श्रीनगर। शहर के निजी अस्पताल में शनिवार को इलाज के दाैरान पांपोर निवासी 34 वर्षीय युवक की माैत हो गई। इस पर परिजन भड़क गए और चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए खूब हंगामा और प्रदर्शन किया। कहा- हमने इलाज के लिए पांच लाख रुपये दिए और बदले में हमें लाश मिली।
चचेरे भाई शेख आमिर ने बताया कि पांपोर के बिलाल कॉलोनी निवासी वसीम अहमद पठान हाल ही में सऊदी अरब से लौटा था और टूर एंड ट्रैवल व्यवसाय शुरू किया था। वसीम को पेट में दर्द की शिकायत के बाद आठ दिन पहले पारस अस्पताल सोनवार में भर्ती कराया गया था। डॉ. जहूर अहमद शेख ने उसका इलाज किया। उन्होंने 2.5 लाख रुपये का खर्च बताते हुए सर्जरी की सिफारिश की। परिवार सहमत हो गया, पैसे चुकाए और सर्जरी की गई।
शुरुआती सर्जरी के बाद वसीम को छुट्टी दे दी गई, लेकिन उसकी हालत सुधरने के बजाय तेजी से बिगड़ती चली गई और दो दिन बाद वापस अस्पताल ले जाना पड़ा। वहां दोबारा सर्जरी करने की बात कही गई और हमसे 2.5 लाख रुपये और वसूले गए। इस दाैरान हमें वार्ड में जाने से मना कर दिया गया। बाद में हमें बताया गया कि उसके पेट में खून का थक्का जमा था, जिससे उसकी मौत हो गई।
शेख आमिर ने सवाल किया कि अगर यही मौत का कारण था, तो इसका पता क्यों नहीं लगाया गया और पहले इलाज क्यों नहीं किया गया। पहली सर्जरी के दौरान परिवार को क्यों नहीं बताया गया। आमिर ने आरोप लगाया कि जब वसीम की मौत हुई डॉ. जहूर अस्पताल में मौजूद नहीं थे। वह फोन पर जूनियर स्टाफ को निर्देश दे रहे थे। हमने अपने भाई की जान डॉक्टर पर छोड़ दी, लेकिन जब सबसे ज्यादा जरूरत थी, तो वह नहीं थे।
स्वास्थ्य मंत्री और डीसी से कार्रवाई की मांग
वसीम के भाई ने अस्पताल को कत्लखाना और पैसे कमाने वाली इमारत बताया। उन्होंने कहा कि उनका भाई खाड़ी से कश्मीर में नई जिंदगी शुरू करने के लिए लौटा था। अस्पताल ने हमसे पांच लाख रुपये लिए और एक लाश लौटा दी। घटना की खबर फैलते ही दर्जनों रिश्तेदार और स्थानीय लोग अस्पताल के बाहर जमा हो गए और कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। परिवार ने नारे लगाए और स्वास्थ्य मंत्री सकीना इटू और श्रीनगर के डिप्टी कमिश्नर डॉ. बिलाल मोहिउद्दीन भट से मामले की जांच करने की अपील की।
परिजन बोले- जारी रखेंगे विरोध
परिवार के एक सदस्य ने कहा कि अस्पताल प्रशासन से कोई भी हमारे पास नहीं आया। हमने अस्पताल की संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया और न ही अंदर नारे लगाए। हमें सांत्वना देने के बजाय वे छिपे रहे। शोकाकुल परिवार ने न्याय मिलने और संबंधित डॉक्टर और अस्पताल अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज होने तक अपना विरोध जारी रखने की बात कही है।
गंभीर थी मरीज की हालत : डॉ. जहूर शेख
पारस अस्पताल के एमडी डॉ. जहूर शेख ने लापरवाही के आरोपों से इन्कार किया है। उन्होंने बताया कि मरीज को जब भर्ती किया गया, उसकी हालत चिंताजनक थी। परिजन को हालत के बारे में बता दिया गया था। इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई है।