एलजी से मिलने वाले इस ग्रुप में शामिल पूर्व मंत्री अल्ताफ बुखारी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के ज्वलंत मुद्दों के समाधान के लिए अगर उन्हें किसी नए मोर्चे के गठन की जरूरत पड़ती है तो इस विकल्प पर काम किया जा सकता है। अभी यह प्रारंभिक स्तर पर है। हमारी प्राथमिकता है कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल कराने के साथ-साथ अन्य जायज मांगों को पूरा करवाया जाए। हमारे साथ विभिन्न वर्गों के लोग जुड़े हुए हैं।
अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के बाद जम्मू-कश्मीर के लोगों में जो अस्थिरता की स्थिति है, उसे दूर करना पहला मकसद है। अगर कभी सैलाब आ जाता है तो उस पर उम्र भर रोया नहीं जाता, बल्कि अपने टूटे हुए भवन का दोबारा निर्माण करने पर सोचा जाता है। हमें आगे की ओर चलने की जरूरत है। अनुच्छेद 370 का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। हम सभी लोगों की राय लेकर चलेंगे।
पूर्व कृषि मंत्री गुलाम हसन मीर ने कहा कि सरकार को हिरासत में लिए गए और नजरबंद नेताओं को जल्द से जल्द छोड़ना चाहिए। उनकी भी राय ली जाएगी। गत 5 अगस्त को तूफान आया था, जिसमें कई व्यवस्थाएं तहस-नहस हुई हैं। उम्मीद है आगे कुछ पुराने भवनों के साथ नए भवन भी बनेंगे।
अफसरशाही उचित विकल्प नहीं: जफर
पूर्व एमएलसी जफर इकबाल का कहना है कि राजनीतिक संस्थान का अफसरशाही उचित विकल्प नहीं हो सकती है। जेलों में डाले गए और नजरबंद राजनेताओं को रिहा किया जाने से इस पर बात आगे बढ़ सकती है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था जल्द हो बहाल: कमर
पूर्व विधायक चौधरी कमर हुसैन ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को शीघ्र बहाल किया जाना चाहिए। ऐसा होने पर आगामी चुनाव में सभी राजनीतिक दलों के नेता मैदान में रहेंगे।