जीजीएम साइंस कालेज के ज्योलाजी विभाग के म्यूजियम में उल्का पिंड के टुकड़ों के अलावा तैरने वाले पत्थर और अन्य दूसरी अद्भुत सामग्री हैरत में डाल देती है। म्यूजियम में अणु-परमाणु बम तैयार करने में उपयोगी यूरेनियम के टुकड़े भी सबको आकर्षित करते हैं।
ऐसी कई अनमोल पदार्थों पर विद्यार्थी नियमित अध्ययन कर रहे हैं। म्यूजियम में जो उल्का पिंड के टुकड़े रखे गए हैं, उन्हें तत्कालीन इटली सरकार ने कालेज म्यूजियम को वर्ष 1942 में दिया था।
तब से लेकर अब तक यहां पढ़ने वाले स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं के विद्यार्थी लाभ उठा रहे हैं। खनिजों में यूरेनियम के टुकड़े रखे हुए हैं, जिनके बारे में विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। गौरतलब है कि यूरेनियम को अणु-परमाणु बम तैयार करने में इसकी उपयोगिता होती है।
जो पत्थर गंभीर होते हैं वे पृथ्वी तक पहुंचते हैं
इसके अलावा इस म्यूजियम में तैरने वाले पत्थर के दो टुकड़े भी रखे गए हैं, जिन्हें वैज्ञानिक शब्दावली में ज्युमिस कहा जाता है। शार्क मछली के दांत हैं, जो लाखों साल पुराने बताए जाते हैं।
इस संबंध में ज्योलाजी विभाग के डा.चंचल कुमार खजूरिया ने बताया कि यहां की म्युजियम में करीब दस हजार से अधिक खनिज पदार्थ, जीवाष्म व प्राणियों के अवशेष तथा बहुमूल्य धातुओं का संकलन है जिसमें इटली सरकार द्वारा कालेज को 1942 में प्रदान किए गए उल्का पिंड के दुर्लभ तीन टुकड़े हैं।
तीनों की वैराइटी अलग हैं। पहली लोहेवाली वैराइटी है जबकि दूसरी पथरीली एवं तीसरी मिक्स है। उन्होंने बताया कि मंगल व पृथ्वी के बीच जो पत्थर हैं, वे कई बार गुरुत्वाकर्षण के कारण पृथ्वी की ओर खींचे चले आते हैं और इसका परिणाम होता है कि जो पत्थर गंभीर होते हैं वे पृथ्वी तक पहुंचते हैं।
तो इसलिए तैरते हैं पत्थर
तैरने वाले पत्थर यानी ज्यूमिस के बारे में बताया गया कि ज्वालामुखी जब फटता है तो लावा निकलता है, इस लावा से ही ज्यूमिस का निर्माण होता है। इस ज्यूमिस पत्थर के अंदर हुए छिद्र में हवा भर जाती है जिससे यह पत्थर पानी में तैरता रहता है। फ्लैक्सिबल राक (लचीले पत्थर) भी यहां पर हरियाणा जिंद से मंगवाए गए हैं, जिनका अध्ययन विद्यार्थी करते हैं।
सीसीटीवी कैमरों की नजर में म्यूजियम
प्रिंसिपल डा. नूतन कुमार ने बताया कि कालेज में कुल 28 सीसीटीवी कै मरे लगाए गए हैं, जिसमें एक ज्योलाजी म्यूजियम में भी पंद्रह दिन पहले सीसीटीवी कै मरे लगाए गए। वही, म्यूजियम में हर रखे कीमती धातुओं, खनिज पदार्थों और जीवाष्म की सुरक्षा प्रदान करने के लिए कैटलाग प्रणाली आरंभ की गई है जबकि इनकी फोटोग्राफी की भी गई है।