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रस्सियों में जकड़ कर रखता है इस मासूम को इसका परिवार

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घर का बड़ा बेटा छोटू ग्यारह साल का है। बचपन से उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं है। थोड़ा बड़ा हुआ तो कभी दूसरों तो कभी खुद को चोट पहुंचाने लगा। घर वाले इसके चलते उसे रस्सी से बांधकर रखते हैं। मझले बेटे की आंखों में जन्म से रोशनी नहीं है।
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तीसरा बेटा हुआ तो वह भी मानसिक रूप से विक्षिप्त है। गरीबी रेखा से नीचे किसी तरह गुजर बसर करने वाले परिवार के सदस्य मदद के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के दर पर फरियाद करते-करते थक गए, लेकिन कोई उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया।

कंडी क्षेत्र की रख होशियारी पंचायत के रहने वाले सुखदेव के पास कोई काम धंधा भी नहीं है। वह मजदूरी करके किसी तरह परिवार को पेट पालता है। सुखदेव ने बताया कि बड़ा बेटा बचपन से ही मानसिक रूप से अक्षम था।
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थोड़ा बड़ा हुआ तो उसमें हिंसक प्रवृति आने लगी। उसे न तो उसे किसी स्कूल में पढ़ने के लिए भेज सकते हैं और न ही घर में अन्य बच्चों की तरह खेलने दे सकते हैं। ऐसे में मजबूरी में उसे घर में रस्सियों से बांध कर रखना पड़ रहा है।
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बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही

सुखदेव ने बताया कि अन्य दो बच्चों में एक नेत्रहीन है, तो दूसरे की मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं है। ऐसी विकट परिस्थितियों में उसे घर का खर्च चलाने से भी ज्यादा बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है।

पंचायत के माध्यम से उसने अलग-अलग विभागों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली। गांव की पंच पिंकी देवी ने बताया कि सुखदेव के परिवार की हालत बेहद चिंताजनक है।

आर्थिक सहायता के लिए मामले को चुने हुए नुमाइंदों के समक्ष रखा गया था, जहां से आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। बच्चों के पुनर्वास के लिए भी कोई कारगर प्रयास नहीं हो पाए हैं। ऐसे में जिला मुख्यालय से कुछ किमी दूर होने के बावजूद सुखदेव का परिवार अपने हाल पर जीने को मजबूर है।
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