सुंजवां में हमले के बाद अब सुरक्षा खामियों को भी देखा जा रहा है। कैंप की सुरक्षा में कई लूप होल भी दिखाई दे रहे हैं। 15 किलोमीटर के दायरे में फैले कैंप की दीवारें कई जगह पर कमजोर हैं। कुल छह मुख्य दरवाजों से कैंप में दाखिल हुआ जा सकता है।
कैंप के प्रमुख गेट शिवालिक पर ज्यादा सुरक्षा व्यवस्था है। वहीं, अल्फा और ब्रावो गेट के पास कुछ खामियां साफ झलकती हैं। ब्रावो और अल्फा गेट के मध्य तकरीबन दो किलोमीटर का फासला है। इस फासले में रोहिंग्या बस्ती और स्थानीय लोगों को ऊंचे मकान से कैंप के भीतर की गतिविधि पर साफ तौर पर नजर बनाए रखा जा सकता है।
अल्फा गेट से आगे बढ़ने पर दो किलोमीटर के दायरे में घना जंगल आता है। शक है कि फिदायीन दस्ते इसी जंगल वाले इलाके का फायदा उठाकर रात के वक्त कैंप में दाखिल हुए होंगे।
61 घंटों तक अंदर फंसे सैन्य परिवार वालों को स्कूल और सुरक्षित क्वार्टरों में पहुंचाने के बाद उन्हें अंदर ही सैन्य कैंप के मेस से भोजन और जरूरी चीजें दी जा रही थी। सूत्रों की मानें तो ब्रिगेड के पास अपने लोगों के भोजन के लिए पर्याप्त सुविधा थी। फिर भी कुछ जरूरी खाने-पीने का सामान अन्य कैंपों से वाहन के जरिये लाए जा रहे थे।