आकाशवाणी उर्दू सर्विस के 50वें स्थापना दिवस पर आकाशवाणी की तरफ से थियेटर फेस्टिवल का आयोजन किया गया। फेस्टिवल के तीसरे दिन जम्मू यूनिवर्सिटी के जनरल जोरावर सिंह आडीटोरियम हाल में पाकिस्तान के प्रसिद्ध साहित्यकार सादत हसन मंटो की कहानी ‘तेतवाल के कुत्ते’ का मंचन किया गया, जिसमें शानदार अभिनय से कलाकारों ने बताया कि जानवर के लिए कोई सरहद नहीं होती है।
उसके लिए सब कुछ एक समान है। शाम करीब पांच बजे नाटक आरंभ हुआ। नाटक में दिखाया गया कि भारत में अंतर्राष्ट्रीय सीमा के नजदीक रहने वाला कुत्ता एक दिन सीमा पार करके पाकिस्तान पहुंच जाता है। पाकिस्तान के लोग कुत्ते की सुंदरता पर मोहित हो जाते हैं। अचानक व्यक्ति की नजर कुत्ते के गले में बांधे गए पट्टे पर पड़ती है।
पट्टे पर कुत्ते और देश का नाम लिखा होता है। लोग समझ जाते हैं कि कुत्ता भारत से पाकिस्तान पहुंच गया है। वह कुत्ते के गले से पट्टा निकालकर दूसरा पट्टा बांधते हैं और कुत्ते को सीमा के नजदीक छोड़ देते हैं। कुत्ता फिर सीमा को पार करके अपने देश में लौटने का प्रयास करता है।
जैसे ही कुत्ता सीमा के नजदीक पहुंचता है तो भारत और पाकिस्तान के सुरक्षा बलों की नजर कुत्ते पड़ जाती है और दोनों तरफ से फायरिंग शुरू कर दी जाती है। इस फायरिंग में कुत्ता मारा जाता है। कहानी में संदेश दिया गया कि कुत्ते के लिए अंतर्राष्ट्रीय सीमा का कोई महत्व नहीं है।
उसके लिए सारी दुनिया एक समान है। उसे नहीं पता होता कि यह भारत की सीमा है और सामने पाकिस्तान की सीमा है। नाटक का निर्देशन सलीमा रजा ने किया। कुत्ते का किरदार अमिनेश जेम्स ने निभाया।