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एक्सक्लूसिव: अलगाववादियों ने सच छिपाने को किया वार्ता ठुकराने का ड्रामा

Mon, 05 Sep 2016 12:47 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
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कश्मीर के अलगाववादी नेता - फोटो : File Photo
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कश्मीर में शांति मिशन पर आई सर्वदलीय समिति से बातचीत ठुकराकर असलियत पर पर्दा डालने की कोशिश की है।
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इस ड्रामे के जरिए अलगाववादियों ने अपने खिसके जनाधार को छिपाने का असफल प्रयास किया। दरअसल, विरोध प्रदर्शनों पर अब अलगाववादियों की पकड़ खत्म हो चुकी है।

अलगाववादियों के सभी बड़े नेता नजरबंद हैं। ऐसे में विरोध प्रदर्शन और हिंसा को कट्टरवादी और पाकिस्तान पोषित आतंकी संगठन ही भड़का रहे हैं। अलगाववादियों को अब खुद पर इतना भरोसा नहीं रह गया है।
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'कश्मीर को इस हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता'

अलगाववादी से मिलने जाते समिति के सदस्य - फोटो : ANI
सुरक्षा एजेंसियों ने केंद्र को सूचित किया है कि अब अलगाववादियों की पकड़ विरोध प्रदर्शनों पर नहीं रह गई है।

अलगाववादी जनाधार का भ्रम बनाए रखने के लिए प्रदर्शनों का कैलेंडर जारी कर रहे हैं। बातचीत की पहल के विफल हो जाने से अब सर्वदलीय समिति और केंद्र के समक्ष भी नई चुनौतियां खड़ी हो गईं हैं।  

पीडीपी के प्रवक्ता और रियासत के शिक्षा मंत्री नईम अख्तर कहते हैं कि कश्मीर को इस हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता। जब केंद्र की ओर से पहल हुई और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने न्योता दिया तो सभी हित धारकों को सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए। इसमें खलल डालने वाले कश्मीर का ही नुकसान कर रहे हैं।

अलगाववादियों से स्थानीय स्तर पर होनी चाहिए थी बातचीत

कांफ्रेंस हाल में मौजूद सर्वदलीय समिति के सदस्य - फोटो : PTI
नेशनल कांफ्रेंस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला केंद्र सरकार पर आग लगने पर कुआं खोदने की नीति का आरोप मढ़ रहे हैं। उमर ने बातचीत के लिए अलगाववादियों को रिहा नहीं किए जाने पर भी सवाल खड़े किए हैं।  

सर्वदलीय समिति के दौरे के क्रम में लचर होम वर्क भी उजागर हुआ है। पीडीपी सूत्रों के मुताबिक अलगाववादियों से बातचीत पर दौरे से एक दिन पहले तक असमंजस की स्थिति बनी रही। केंद्र सरकार ने संविधान के दायरे में बातचीत की नीति पर कायम रहने का फैसला किया और विपक्षी सदस्यों का अलगाववादियों से मुलाकात का प्रोग्राम भी अंत में तय हुआ।

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी सर्वदलीय समिति के दौरे से एक दिन पहले ही हुर्रियत नेताओं को पत्र भेजा। पीडीपी के नेता भी मानते हैं कि अगर अलगाववादियों से बातचीत का निर्णय पहले हो जाता तो इसके लिए माहौल बनाने में और आसानी होती।

अलगाववादियों के पास सर्वदलीय समिति के नेताओं के सीधे पहुंचने के बजाय उनसे पहले स्थानीय स्तर पर बातचीत की जानी चाहिए थी। नतीजतन समिति के सदस्यों को अलगाववादियों से उपेक्षा झेलनी पड़ी।
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अलगाववादियों ने की आलोचना

अलगाववादी नेता ग‌िलानी - फोटो : Amar Ujala
अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और मोहम्मद यासीन मलिक ने संयुक्त बयान में कहा कि डेलीगेशन के पास जब कोई स्पष्ट एजेंडा ही नहीं है तो उससे उम्मीद करना बेमानी है।

अलगाववादी नेताओं ने कहा कि मुख्य मुद्दा कश्मीर को आत्मनिर्णय के अधिकार का है। भारत ने राजनीति में पिछले 70 वर्ष से धोखे और गुमराह करने की नीति अपनाई है। इन नेताओं ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की आलोचना करते हुए कहा उन्होंने केवल केंद्रीय डेलीगेशन को मान्यता देने पर ही जोर दिया।
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