कोटरंका इलाके के दो गांवों के लापता तीन युवकों के परिजनों ने मंगलवार को डीआईजी विवेक गुप्ता और एसएसपी चंदन कोहली से मुलाकात कर बेटों को ढूंढने की अपील की।
परिजनों ने कहा कि यदि शोपियां में मारे गए आतंकवादी उनके बच्चे नहीं थे तो उनकी जल्द तलाश की जाए। यदि शोपियां में एनकाउंटर में मारे गए हैं तो उनका डीएनए टेस्ट कराकर शव उन्हें सौंपे जाएं और पूरे मामले की न्यायिक ज्यूडीशियल जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके।
उन्होंने दोनों अधिकारियों से कहा कि घर का खर्च चलाने के लिए लॉकडाउन में श्रीनगर में मजदूरी करने गए थे। वहीं डीआईजी व एसएसपी ने उन्हें आश्वासन दिया कि पुलिस अपना कार्य कर रही है। जल्द ही इस मामले में सच सामने लाया जाएगा।
बता दें, कोटरंका सब डिवीजन के धार साकरी और तरकस्सी क्षेत्र के तीनों युवक अबरार अहमद, मोहम्मद अबरार और इम्तियाज अहमद 16 जुलाई को मजदूरी करने कश्मीर घाटी गए थे। 18 जुलाई से उनका कोई अता-पता नहीं है। परिवार के मुताबिक सोशल मीडिया पर खबरें हैं कि शोपियां एनकाउंटर में मारे गए तीनों युवक उनके ही बच्चे हैं।
फर्जी मुठभेड़ सोशल मीडिया ने फैलाई : सलाहकार
उपराज्यपाल के सलाहकार फारूक खान ने फर्जी मुठभेड़ की खबर को सोशल मीडिया की देन बताया है। साथ ही उन्होंने पंचों, सरपंचों या राजनीतिक दलों के सदस्यों पर हो रहे हमलों की निंदा करते हुए कहा कि उनकी सुरक्षा को लेकर विचार कर रही है ताकि सुनिश्चित बनाया जा सके कि भविष्य में ऐसे हमले न हों।
फारूक खान अनंतनाग जिले के डाक बंगले में पत्रकारों से मुखातिब थे। शोपियां मुठभेड़ को लेकर पूछे सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि फर्जी मुठभेड़ की खबर सोशल मीडिया की फैलाई हुई है। यह ठीक बात है कि तीन युवकों के लापता होने की रिपोर्ट आई है। उस संबंधी जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया में चल रही अफवाहें घाटी के हालात दोबारा खराब करने की साजिश भी हो सकती है। अगर ये साजिश होगी तो इसे बुरी तरह से कुचल दिया जाएगा।