अनंतनाग से पहलगाम तक के बीच स्टॉल, दुकान, होटल, रेस्टोरेंट कारोबारी बोले- उम्मीद जाग उठी है
फिदा हुसैन
पहलगाम। जम्मू-कश्मीर का पहलगाम...22 अप्रैल के कारण एक बुरी याद बन चुका है। जो जख्म मिले हैं, उनके निशां तो बाकी रह जाएंगे, पर जिंदगी तो कभी रुकती नहीं, आगे बढ़ना ही पड़ता है। पहलगाम में धीरे-धीरे लौट रहे पर्यटकों को देख यहां के लोगों की उम्मीदें जाग उठी हैं।
अनंतनाग से पहलगाम तक सोमवार को पर्यटकों की कमी दिखाई दी , पर जितने भी थे, वे खुश थे और स्थानीय लोग कारोबार फिर से शुरू होने से राहत महसूस कर रहे थे। संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने सोमवार को अनंतनाग से पहलगाम तक का दौरा किया। इस दौरान खन्नाबल से निकलने के बाद मट्टन पहुंचे। यहां शाकाहारी भोजन के लिए एक रेस्तरां प्रसिद्ध है। कुछ पर्यटक थे जो आने वाले समय की उम्मीद जगा रहे थे।
इसके बाद हम हुतमुरा क्षेत्र की ओर बढ़े, जहां कश्मीरी लोगों के सेब के जूस के स्टॉल लगे थे। आम तौर पर यहां भीड़ रहती है, सामान्य दिनों में पर्यटक सेल्फी लेते नजर आते हैं। बायसरन में आतंकी हमले के बाद सब बंद हो गए थे, अब धीरे-धीरे खुल रहे हैं। इसके बाद टीम अकड़ पार्क होते हुए अश्मुकाम पहुंची, जो साखी दरगाह के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां विभिन्न धर्मों के लोग माथा टेकने आते हैं। स्थानीय नागरिक परवेज ने बताया कि लोग आ रहे हैं, चूंकि गर्मी बहुत ज्यादा है, इसलिए लोग दोपहर में बाहर कम निकले, लेकिन शाम को आवाजाही दिखाई दे रही है। जावेद कहते हैं कि यह सच है कि हजारों की संख्या में जहां पर्यटक आते थे, वहां कुछ सौ पर्यटकों के आने से क्या होगा। पर ये भी सच है कि हादसे के बाद भी पर्यटकों का आना उम्मीद तो जगाता ही है।