- महबूबा मुफ्ती और यूसुफ तारिगामी ने इस फैसले को अमानवीय ठहराया
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर घाटी से मंगलवार को पाकिस्तान के 60 लोगों को उनके मूल देश वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद सियासी बयानबाजी शुरू हो गई है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख एवं जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भारत सरकार के इस फैसले पर चिंता जताते हुए पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। वहीं, सीपीआईएम के वरिष्ठ नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने फैसले को अमानवीय करार दिया है।
महबूबा ने एक्स पर लिखा, हाल ही में भारत से सभी पाकिस्तानी नागरिकों को निर्वासित करने के निर्देश ने गंभीर मानवीय चिंताओं को जन्म दिया है, खासकर जम्मू और कश्मीर में। प्रभावित होने वालों में कई ऐसी महिलाएं हैं, जो 30-40 साल पहले भारत आई थीं। भारतीय नागरिकों से शादी की, परिवार बनाए और लंबे समय से हमारे समाज का हिस्सा रही हैं। हम सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने और महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के प्रति दयालु दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह करते हैं। दशकों से भारत में शांतिपूर्वक रह रहे व्यक्तियों को निर्वासित करना न केवल अमानवीय होगा, बल्कि परिवारों पर गहरा भावनात्मक और शारीरिक संकट भी डालेगा।
वहीं, मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने एक्स पर किए गए पोस्ट में लिखा, 2010 में पुनर्वास नीति लागू करने के बाद जम्मू-कश्मीर में आई पाकिस्तान और पीओके की महिलाओं को निर्वासित करना अमानवीय है। स्थानीय कश्मीरी पुरुषों से विवाह करने वाली इन महिलाओं ने यहां जीवन बनाया है और शांतिपूर्वक रह रही हैं। उन्हें जबरन निर्वासित करने से उनके परिवार बिखर जाएंगे और उन्हें गहरी मानसिक पीड़ा होगी।