पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के एक ट्वीट से शुक्रवार को सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। इस दौरान काफी संख्या में लोगों ने उमर की राष्ट्रभक्ति पर भी सवाल उठाए।
कुछ लोगों ने हालांकि, उमर का समर्थन भी किया। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने शुक्रवार को सरकारी भवनों पर तिरंगे के साथ रियासत का भी झंडा फहराने के सिंगल बेंच के आदेश पर स्टे लगा दिया।
इसके कुछ ही देर बाद उमर ने ट्वीट किया कि अगर मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद रियासत के झंडे के सम्मान की रक्षा नहीं कर सकते तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए और किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश करनी चाहिए जो ऐसा कर सकता हो।
इसके बाद ही सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों में बहस छिड़ गई। उमर ने ट्वीट कर सवाल किया कि क्यों हमेशा सिर्फ जम्मू-कश्मीर की ही अवाम से यह उम्मीद की जाती है कि वो देश से विलय की शर्तों का सम्मान करें जबकि शेष देश इसे नकार देता है।
सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना के जवाब में उमर ने ट्विटर पर लिखा कि जब तक जम्मू-कश्मीर इंडिया का हिस्सा है तब तक रियासत में दोनों झंडे साथ लहराते रहेंगे।
उन्होंने आगे लिखा कि ‘रियासत के झंडे को स्वीकार कर लेने अथवा इसे रियासत और देश के संविधान से स्वीकृति मिलने का मतलब आजादी नहीं है’।