श्रीनगर। श्रीनगर के नौहट्टा स्थित ऐतिहासिक जामिया मस्जिद मार्केट 35 साल बाद 21 मई के दिन खुला। इसे धार्मिक और राजनीतिक नेता मीरवाइज मौलवी मुहम्मद फारूक की हत्या की स्मृति में बंद रखने की परंपरा थी, जो 1990 से चली आ रही थी।
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह बदलाव श्रीनगर पुलिस, जामिया मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन और अंजुमन औकाफ जामिया मस्जिद के बीच वार्ता के बाद संभव हुआ। मार्केट एसोसिएशन के एक सदस्य ने बताया कि स्थानीय पुलिस के साथ सफल वार्ता के बाद बाजार खुला रहा। मीरवाइज मुहम्मद फारूक की 21 मई, 1990 को उनके निगीन स्थित आवास में हत्या कर दी गई थी। यह कश्मीर में उस समय की पहली बड़ी राजनीतिक हत्या थी।
हिजबुल मुजाहिदीन (एचएम) के सहयोगी मुहम्मद अयूब डार को मीरवाइज की हत्या का दोषी ठहराया गया था, और भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 2010 में इस सजा को बरकरार रखा था। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 16 मई, 2023 को मीरवाइज की हत्या के मामले में दो एचएम सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया, जो तीन दशकों से अधिक समय तक फरार थे।
पुलिस जांच के अनुसार, पांच आतंकवादियों मुहम्मद अब्दुल्ला बांगरू, मुहम्मद अयूब डार उर्फ इशफाक, अब्दुल रहमान शिगन उर्फ इनायत, जावेद अहमद भट उर्फ अजमल खान और ज़हूर अहमद भट उर्फ बिलाल ने मीरवाइज की हत्या की थी।
पहले, हर साल 21 मई को डाउनटाउन श्रीनगर में स्वर्गीय मीरवाइज और अब्दुल गनी लोन की पुण्यतिथि पर पूर्ण बंद का पालन किया जाता था, जिसमें दुकानें, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, सरकारी और निजी कार्यालय बंद रहते थे और सार्वजनिक परिवहन ज्यादातर सड़कों से नदारद रहता था। स्वर्गीय मीरवाइज वर्तमान मीरवाइज उमर फारूक के पिता थे।