मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने रियासत में तीन दशक से हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया को मुकम्मल तौर पर अंजाम देने को कहा है।
जेएंडके पुनर्वास परिषद की 7वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक की अध्यक्षता करते हुए महबूबा ने कहा कि आतंकवाद पीड़ितों को सामाजिक मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पुनर्वास जरूरी है। बच्चों, महिलाओं की शिक्षा से लेकर उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए सभी संभव व्यवस्थाएं की जाएं।
उन्होंने कहा, सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह राज्य के हिंसा प्रभावित हर व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वह जनता के लिए योजनाएं व नीतियों को तैयार करते हुए इन पीड़ितों की जरूरतों का पूरा ध्यान रखें।
'युवतियों के विवाह के लिए 40 हजार की सहायता राशि'
मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती
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बैठक के दौरान यह फैसला लिया गया कि विधवा, बेसहारा बच्चों और उनके अभिभावकों की संख्या का सही ब्योरा जुटाने पर काम किया जाएगा ताकि पुनर्वास के लिए हिंसा पीड़ितों का डाटा अपडेट हो सके। यह भी निर्णय लिया गया कि काउंसिल की कार्य योजना को प्रत्येक वर्ष मार्च में आखिरी रूप दिया जाया ताकि अप्रैल से राहत सहायता वितरण का काम शुरू किया जा सके।
बैठक में यह भी तय गया कि युवा विधवा और युवतियों को विवाह सहायता के तौर पर एकमुश्त 40 हजार रुपये दिए जाएंगे। काउंसिल से कहा गया कि वह केंद्र सरकार के उपलब्ध फंडिंग पैटर्न पर हिंसा पीड़ितों को सुविधाएं मुहैया करवाए।
बैठक में समाज कल्याण मंत्री सज्जाद गनी लोन, मुख्य सचिव बी आर शर्मा, वित्त आयुक्त योजना और विकास बी बी व्यास, गृह विभाग के प्रधान सचिव आर के गोयल व अन्य संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे।