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श्राइन बोर्ड का बड़ा फैसला: कटड़ा होगा देश का प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल, अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान

Tue, 10 Feb 2026 01:14 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

श्राइन बोर्ड ने कटड़ा को देश का प्रमुख आध्यात्मिक और खेल केंद्र बनाने की मंजूरी दी है, जिससे शहर का आर्थिक और पर्यटन विकास तेज होगा। इन योजनाओं के लागू होने से कटड़ा उत्तर भारत के महत्वपूर्ण धार्मिक और व्यापारिक हब के रूप में उभरेगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
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श्री माता वैष्णो देवी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने कटड़ा के विकास के साथ ही इस शहर को देश का अग्रणी आध्यात्मिक व खेल शक्ति केंद्र बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण की इन योजनाओं पर अमल होने पर कटड़ा की आर्थिकी को बड़ी रफ्तार मिल सकती है।

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इससे यह शहर जम्मू और श्रीनगर से बड़ा पर्यटन स्थल बनेगा और यह उत्तर भारत के उन प्रमुख शहरों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा जहां धार्मिक केंद्रों के विकास के साथ लोगों के जीवन स्तर में बदलाव आया है। काशी, अयोध्या और उज्जैन जैसे शहर इसकी बानगी हैं। धार्मिक सेवाओं और मंदिरों का अपना एक अर्थशास्त्र होता है। जहां मंदिर होते हैं उसके आसपास विकास कार्य स्वतः हो जाते हैं।

प्राचीन भारत में हर क्षेत्र को धन लाभ इन्हीं तीर्थस्थलों से होता था। हर मंदिर में आकर्षक शिल्पकला, भव्यता, अलौकिक विग्रहों के कारण यह आध्यात्मिक होने के साथ-साथ पर्यटन स्थल भी थे।

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पैसा 5 से सात लोगों के हाथ से गुजरता है
एक ग्राहक का पैसा कम से कम पांच से सात लोगों के हाथ से गुजरता है। आंकड़े देखें तो औसतन एक करोड़ श्रद्धालु माता वैष्णो देवी के दर्शन को हर साल आते हैं। औसतन एक व्यक्ति एक दिन में पांच हजार खर्च करता है यानी 500 करोड़ रुपये की आमदनी होती है। यदि श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक केंद्र में हम रोकने में कामयाब हो गए तो यह पांच हजार रुपये हर दिन के हिसाब से बढ़ेंगे यानी आमदनी में इजाफा होगा। -प्रो. वीरेंद्र कौंडल, अर्थशास्त्री,जम्मू विश्वविद्यालय

स्थानीय अर्थव्यवस्था होगी मजबूत
श्राइन बोर्ड ने जिन पहलों की घोषणा की है उससे श्रद्धालुओं को यहां रोकने में मदद मिलेगी। स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। पर्यटकों-श्रद्धालुओं की संख्या पर सबकुछ निर्भर करता है और इनकी संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास करने होंगे। तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए बनाई कमेटी के सुझावों, लाइट एंड साउंड शो, सेल्फ हेल्फ ग्रुप से काम कराने का फायदा होगा। इससे कटड़ा व यहां के लोग आर्थिक रूप से मजबूत होंगे। -राकेश वजीर, प्रेसीडेंट होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन, कटड़ा

श्राइन बोर्ड से जुड़कर सेल्फ हेल्प ग्रुप को बिचौलियों से मिलेगा छुटकारा
3600 स्वयं सहायता समूह रियासी जिले में हैं। कटड़ा ब्लाक में दो कल्सटर हैं इससे सीधे तौर पर 3000-4000 महिलाएं हैं। अभी ये किसी न किसी मध्यस्थ के माध्यम से सामान बेचती हैं। श्राइन बोर्ड से सीधे जुड़ जाएंगी तो इनकी मेहनत का पूरा हिस्सा इन्हें मिलेगा। -जुगल शर्मा, स्वयं सहायता समूह, जिला समन्वयक

मैं खुद श्राइन बोर्ड का प्रोडक्ट
आज की तारीख में श्राइन बोर्ड द्वारा संचालिक अकादमी के खाते में अकेले 65 पदक हैं। सरकार के खाते में 84 पदक हैं। दो अर्जुन अवार्डी भी इसी श्राइन बोर्ड अकादमी की देन हैं। ये आंकड़े और उपलब्धियां प्रमाण हैं कि श्राइन बोर्ड की भविष्य के चैंपियन तैयार करने और खेल के शक्ति केंद्र की घोषणा से आने वाले समय में दूरगामी परिणाम मिलेंगे। -राकेश कुमार, पैरा तीरंदाज, अर्जुन अवार्डी

आस्था विकास से जुड़ी तो आध्यात्मिक केंद्रों की बदली आर्थिकी गुणक प्रभाव से ढाई से तीन गुना बढ़ जाती है आमदनी
काशी विश्वनाथ धाम के भव्य निर्माण के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। औसतन हर दिन 3 लाख श्रद्धालु आते हैं जबकि सावन, महाशिवरात्रि या अन्य विशेष अवसरों पर संख्या कई गुना अधिक होती है। 2014 में 50 हजार से एक लाख बिस्वा बिकने वाली जमीनों की कीमत 35 लाख बिस्वा हो चुकी है। अर्थशास्त्र का एक नियम गुणक प्रभाव का है। आस्था विकास से जुड़ जाती है तो जो घोर आस्थावान होते हैं वो तो आते ही हैं, उनके साथ घूमने-फिरने वालों की संख्या भी बढ़ती है। ढाई से तीन गुना आमदनी बढ़ती है। कटड़ा में विकास का असर भी ऐसे ही देखने को मिलेगा। -प्रो. अनूप मिश्रा, अर्थशास्त्री, डीएवी काॅलेज, वाराणसी

उज्जैन कॉरीडोर बनने के बाद लोगों को हुआ दोगुना फायदा
उज्जैन श्री महाकाल मंदिर का कॉरीडोर बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हुआ है। सामान्य दिनों में प्रतिदिन लगभग 1.25 लाख से 1.5 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। वीकेंड (शनिवार-रविवार) और त्योहारों या छुट्टियों के दौरान यह संख्या 2 लाख से अधिक हो जाती है। विशेष अवसरों पर आंकड़ा 4 से 5 लाख तक हो जाता है। पहले यह संख्या आधी थी। पहले 50 हजार के आासपास श्रद्धालु मंदिर आते थे। अब यह संख्या दोगुनी हो चुकी है। हर किसी को रोजगार मिला है। अभी तो काम चल रहा है और कुंभ आने वाला है। कारोबार में और वृद्धि होगी।-संजय शर्मा, पुजारी, महाकाल मंदिर, उज्जैन
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श्रीराम मंदिर ने बदल दी अयोध्या नगरी की आर्थिकी
जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अयोध्या के राम मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या में भारी उछाल आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रतिदिन औसतन सवा लाख, विशेष मौकों पर यह संख्या तीन लाख तक पहुंच जाती है। श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा ने अयोध्या की आर्थिकी को बदल दिया है। संपत्ति की कीमतें 10 गुना तक बढ़ गई हैं। मेरा खुद का सर्वे है कि जो दुकानें तोड़े जाने पर विरोध कर रहे थे, आज पांच गुना तक कमाई कर रहे हैं। एक मिठाई वाला जो 200 रुपये प्रतिदिन मुश्किल से कमाता था। आज 2000 से 3000 रुपये कमा रहा है। होम स्टे, होटल इंडस्ट्री, एमएसएमई सेक्टर बूम कर रहे हैं। -डॉ. विनोद श्रीवास्तव, अर्थशास्त्री अवध विश्वविद्यालय, यूपी एक्सप्रेस वे भू अधिग्रहण कमेटियों के चेयरमैन
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