बांदीपोरा के हिमालयी क्षेत्र में मौजूद गुज्जर और बकरवाल समुदाय के बच्चे। स्रोत : संवाद।
- फोटो : samvad
जून के अंतिम सप्ताह से कश्मीर में गुज्जर और बकरवाल समुदाय के लोगों का मौसमी प्रवास शुरू हो गया है। इस समुदाय के छात्र अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं। इसके लिए बांदीपोरा में अस्थायी शिक्षा केंद्र/ स्कूल बनाए गए हैं लेकिन इन खानाबदोश समूहों के छात्रों का आरोप है कि शिक्षकों की कमी के कारण उनकी पढ़ाई बाधित है। छात्रों का आरोप है कि कई केंद्रों में शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
ऊपरी हिमालय क्षेत्र में तंबुओं में स्थापित ये मौसमी स्कूल इन खानाबदोश बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए स्थापित किए गए थे लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और है। छात्रों का कहना है कि वाटरप्रूफ टेंट, ब्लैकबोर्ड और उचित शिक्षण सामग्री जैसी बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं। विशेषकर भारी बारिश के दौरान केंद्र लगभग पूरी तरह बंद हो हो जाता है। छात्रों की मांग है कि पर्याप्त सुविधाओं के साथ ही शिक्षा केंद्र पर शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। ताकि दुर्गम हिमालयी इलाकों में उनकी शिक्षा प्रभावित न हो।
इस बाबत बांदीपोरा के मुख्य शिक्षा अधिकारी कहते हैं कि प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ज़िले में हमारे 51 मौसमी शिक्षा केंद्र हैं जहां 581 छात्रों को पढ़ाने के लिए 51 शिक्षक तैनात हैं। विभाग टेंट, किताबें और स्टेशनरी भी उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।