राज्य में होने वाले पंचायत चुनाव के दौरान नेताओं की सुरक्षा बड़ी चुनौती होगी। जिस तरह से घाटी में मंत्रियों से लेकर जिला स्तर और पंचायत सदस्यों को निशाना बनाया जा रहा है, उससे साफ है कि चुनाव में आतंकवाद एक बड़ा चुनौती होगी। इससे निपटने के लिए पुलिस और अन्य एजेंसियों को दुगने सुरक्षा बंदोबस्त करने होंगे।
घाटी में आतंकी कई सरपंचों और पंचों की हत्या कर चुके हैं। इसकी वजह से कई ने इस्तीफा तक दे दिया था। अब फिर से चुनाव होने जा रहा है, जिसमें आतंकी चुनाव के दौरान खलल जरूर डालेंगे। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि चुनाव को लेकर जितनी भी फोर्स की आवश्यकता होगी, उसको इस्तेमाल किया जाएगा, लेकिन चुनाव शांतिपूर्वक कराए जाएंगे।
अभी यह तय नहीं हुआ कि चुनाव कब होंगे। जब भी चुनाव की घोषणा होगी, उसी वक्त से इसकी तैयारियां भी शुरू हो जाएंगी। पुलिस पहले से ही इस तरह की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है।
खुफिया एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि हिजबुल मुजाहिदीन चुनाव में सबसे अधिक खलल डाल सकता है। इसलिए हिजबुल के स्थानीय नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सुरक्षा एजेंसियां मिलकर रणनीति बना रही हैं। ताकि चुनाव से पहले इनके नेटवर्क को धराशायी कर दिया जाए।