उधमपुर हमले में साले-बहनोई द्वारा दबोच लेने के बाद पाक आतंकी कासिम उनसे लगातार यह गुहार करता रहा कि मुझे गोली मार दो, मैं हिंदुस्तानी फौज के हाथों नहीं मरना चाहता।
उधमपुर-चिनैनी के बीच नरसू नाले के पास जम्मू श्रीनगर हाइवे पर हमला करने वाला कासिम पुलिस को सुपर्द किए जाने तक लगातार यही रट लगाता रहा। उसके चेहरे पर खौफ नहीं था। ऐसा लगता था मानो वह अपने अंजाम से बा-खबर था और दिमागी तौर पर इसके लिए तैयार था।
कासिम और उसके द्वारा बंधक बनाए गए लोग चार घंटे से भी अधिक समय तक साथ थे। उसे कब्जे में लेने वाले राकेश ने बताया कि उसने और उसके बहनोई विक्रम ने आतंकी को जानबूझ कर खूब थका दिया था।
खुदा के लिए उसे गोली मार दो
इसके लिए उन्होंने टेढ़े-मेढ़े रास्ते को चुना। दोपहर करीब 12 बजे जब उन्होंने पहाड़ी के ऊपर से पुलिस को आते देखा तो उनकी हिम्मत बढ़ गई। तब वह लोग चुप बैठे हुए थे। उसने कासिम को गर्दन से पकड़ा और दोनों हाथ पकड़ लिए।
इस बीच कासिम ने गोली चलाने की कोशिश की तो जीजा विक्रमजीत ने बंदूक के ट्रिगर में अपनी उंगली फंसा दी। इस जोर-आजमाइश में एक गोली भी चली। लेकिन दोनों ने कासिम को नीचे दबोच लिया।
करीब 45 मिनट के बाद पुलिस उनके पास पहुंची। 45 मिनट तक कासिम दोनों से यहीं कहता रहा कि खुदा के लिए उसे गोली मार दो। पुलिस या सेना उसके पास आएगी तो उसे मार देगी।
रास्तो दिखाओ, नहीं तो गोली मार दूंगा
सुबह आठ बजे सबसे पहले कासिम ने पहाड़ पर बैठे देसराज और रमेश को बंधक बनाया और कहा कि उसको रास्ता दिखाकर जंगल में सेफ जगह पहुंचाए। वह दोनों चल पड़े। रास्ते में जाते वक्त राकेश मिला तो कासिम ने राकेश को भी अपने साथ चलने को कहा।
राकेश के बाद उसका जीजा विक्रमजीत भी मिल गया जो घर के बाहर टहल रहा था। कासिम ने इसे भी बंधक बना लिया। चारों को लेकर आगे बढ़ा। रास्ते में मजदूर राजकुमार मिला। इसके पास से कासिम ने आलू फली की सब्जी ली और एक रोटी खाई। कासिम ने सबसे कहा कि वह गोली मार देगा अगर उसको रास्ता नहीं दिखाया।
राकेश और विक्रमजीत ने बताया कि पूरा घटनाक्रम सुबह आठ बजे से लेकर पौने एक बजे तक चला। तब कासिम ने उन्हें बताया कि वह पुंछ में पाकिस्तान से जंगल के रास्ते आया है। उसका नाम कासिम है। जितनी देर भी बात की, वह हंस रहा था और उसके चेहरे पर खौफ नहीं था।