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अशरफ सेहरई पहला अलगाववादी नेता जिसका बेटा जुनैद बना था आतंकी

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श्रीनगर। डॉउनटाउन में मारा गया हिजबुल का डिवीजनल कमांडर जुनैद अहमद सेहरई किसी भी अलगाववादी परिवार का पहला सदस्य है जिसने आतंकी संगठन का दामन थामा था। मंगलवार को वह सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया। जबकि ज्यादातर अलगाववादियों के बेटे या तो सरकारी विभागों में नौकरी करते हैं या फिर विदेश में जमे हैं। जुनैद के पिता मोहम्मद अशरफ सेहरई तहरीक-ए-हुर्रियत के चेयरमैन हैं।
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दूसरी ओर श्रीनगर में हुई इस मुठभेड़ के बाद सुरक्षा एजेंसियां चौकन्नी हो गई हैं। उनके लिए नई चुनौतियां पैदा हो गई हैं। क्योंकि सुरक्षबलों की आतंकियों के साथ यहां दो वर्ष बाद कोई मुठभेड़ हुई है। इससे पहले वर्ष 2018 में हुई अंतिम मुठभेड़ में तीन आतंकी मारे गए थे। वर्ष 2014 में यहां आतंकी गतिविधियों का लगभग खात्मा हो गया था।
घाटी में पत्थरबाजों का था मास्टरमाइंड
मारा गया आतंकी जुनैद आतंकी संगठन में शामिल होने से पहले घाटी में पत्थरबाजी की घटनाओं के पीछे का मास्टर माइंड था। खासकर दक्षिण व पश्चिम श्रीनगर में। आतंकवाद निरोधक अभियानों के दौरान वह मुठभेड़स्थल के पास पहुंचकर भीड़ का नेतृत्व करता था ताकि ऑपरेशन में बाधा पहुंचाई जा सके। वह युवाओं को मुठभेड़स्थल तक पहुंचने के लिए भी उकसाता था ताकि आतंकियों को भागने में सफलता मिल सके।
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हथियार लूट, बैंक डकैती में भी रहा शामिल
जुनैद विभिन्न आतंकियों घटनाओं में शामिल रहने के साथ ही युवाओं को ड्रग व नारकोटिक्स की खेप देता था। बाद में इनका इस्तेमाल वह ओजीडब्ल्यू के रूप में करता था। वह सुरक्षा बलों पर हमले कर हथियार लूट, बैंक डकैती, दक्षिण व मध्य कश्मीर में ग्रेनेड हमले में भी शामिल रहा। संगठन के नाम पर वह धन की उगाही करता था।
पुलिसकर्मियों को नौकरी छोड़ने के लिए धमकाता था
पुलिस ने बताया कि हिजबुल कमांडर जुनैद दक्षिणी कश्मीर में पुलिसकर्मियों को नौकरी छोड़ने के लिए धमकाता था। उसने खान मोहल्ला में एसपीओ रोमन राशिद पर हमला किया था। इसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। पुलिस के मुखबिर होने के शक में त्राल के मिदूरा में मंजूर अहमद हजाम, हिजबुल के लिए पैसा देने से मना करने पर अवंतीपोरा के अमलार में दवा दुकानदार नसीर अहमद गनेई को गोली मार दी थी।
प्रोबेशनरी डिप्टी एसपी भी हिस्सा बने
डाउनटाउन में मुठभेड़ में डिप्टी एसपी (प्रोबेशन) निखिल बोरकर पूरे ऑपरेशन में शामिल रहे। वह किसी भी आतंकवाद निरोधक अभियान का पहली बार हिस्सा बने। शुरू से लेकर आखिर तक ऑपरेशन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी भूमिका की सभी ने सराहना की।
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