खूंखार आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में कई रैलियां कीं। अफगानिस्तान सरकार के खिलाफ तालिबान के साथ लड़ने गये उनके आतंकी स्वदेश लौट आए हैं।
वीडियो में इन आतंकियों को एक-दूसरे को गले लगाते और हवा में गोलियां चलाते हुए देखा जा रहा है। यह दृश्य कथित तौर पर अब्बासपुर, हजीरा और सेंसा क्षेत्रों से हैं, जो नियंत्रण रेखा (एलओसी) से बहुत दूर नहीं है।
ग्लासगो में रहने वाले निर्वासित पीओके कार्यकर्ता डॉ अमजद अयूब मिर्जा ने कहा कि दर्जनों पीओके स्थित तालिबान जो इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) और पाकिस्तानी सेना के निर्देश पर लड़ने के लिए अफगानिस्तान गए थे। अब वापस लौटने लगे हैं। कल दर्जनों तालिबानी युवक पीओके के हजीरा में पहुंच गए हैं। वे लोगों की जांच कर और उनसे उनके आईडी कार्ड मांगकर स्थानीय आबादी को आतंकित कर रहे हैं।
माना जाता है कि तालिबान को इस साल 15 अगस्त को काबुल गिराने तक इस्लामाबाद से सक्रिय राजनीतिक और सैन्य सहायता मिल रही थी। पाकिस्तानी सेना के संरक्षण में पाले जाने वाले आतंकियों ने एक बल गुणक के रूप में काम किया। डॉ मिर्जा ने कहा कि इसका मूल उद्देश्य स्थानीय लोगों में डर पैदा करना और जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने के लिए पाकिस्तानी लॉन्चिंग पैड का इस्तेमाल करना है।
आने वाले समय में दोनों आतंकवादी समूहों ने मुख्य रूप से भारत पर ध्यान केंद्रित किया है। जहां उनके मिशनों में आतंकवादी हमले, घुसपैठ, नई दिल्ली के हितों की घुसपैठ और तोड़फोड़ करना शामिल है। उनके कई भयावह साजिशों को अंजाम देने के लिए उन्हें सीधे सरकारी खजाने द्वारा वित्त पोषित किया गया है। कई कारणों में से एक है कि पाकिस्तान खुद को एफएटीएफ की ग्रे सूची में क्यों पाता है।