शहर के बाहरी क्षेत्र पांपोर में आतंकियों ने एक बार फिर सेना के काफिले को निशाना बनाया। हमले में सेना के 3 जवान शहीद हो गए। एक जवान घायल है। उसे सेना के 92 बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इलाके की नाकाबंदी कर आतंकियों की धरपकड़ के लिए सर्च आपरेशन चलाया गया, पर आतंकी वारदात को अंजाम देकर फरार होने में सफल रहे। वारदात के पीछे आतंकी संगठन लश्कर का हाथ माना जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार आतंकियों द्वारा श्रीनगर की ओर आ रहे सेना के काफिले को शहर से करीब 3 किलोमीटर दूर पांपोर टाउन में दोपहर करीब साढ़े तीन बजे निशाना बनाया गया। सूत्रों ने बताया कि मोटरसाइकिल सवार तीन आतंकियों ने काफिले पर ताबड़तोड़ फायरिंग की। इलाके में नागरिकों की मौजूदगी के चलते सेना के जवानों ने हवाई फायरिंग की।
भीड़ का फायदा उठाकर आतंकी फरार
POMPORE
- फोटो : Amar Ujala
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि आतंकी वारदात करने के बाद तुरंत भीड़ का फायदा उठाते हुए फरार हो गए। उन्होंने कहा कि सेना द्वारा काफी संयम बरता गया। अगर वह भी आतंकियों की फायरिंग का जवाब देते तो कई आम नागरिकों की जान जा सकती थी। हमले के बाद सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के शीर्ष अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
कश्मीर घाटी में पहले भी आतंकियों ने सुरक्षा बलों के काफिलों को निशाना बनाया है। पांपोर में हमले से पहले भी श्रीनगर के पास जकूरा में 14 अक्टूबर को आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर हमला किया था।
इसमें सशस्त्र सीमा बल का एक जवान शहीद हो गया था, जबकि 8 अन्य जवान घायल हुए थे। 25 जून 2016 को जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर सीआरपीएफ के काफिले पर हमला हुआ था। इसकी जिम्मेदारी लश्कर ने ली थी। इसमें 8 जवान शहीद हुए थे और करीब 20 जवान घायल हुए थे। इस दौरान सुरक्षा बलों ने दो आतंकी ढेर किए थे।
पांपोर लगातार निशाने पर
pampore encounter
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पांपोर में ही 10 अक्टूबर को आतंकियों द्वारा ईडीआई बिल्डिंग पर हमला किया गया था। तीन दिन तक चली मुठभेड़ के बाद सेना ने दो आतंकियों को मार गिराया था।
20 फरवरी को भी आतंकियों ने पांपोर में ही इसी बिल्डिंग को निशाना बनाया था। तब 48 घंटे तक चले ऑपरेशन में दो सैन्य अफसर, तीन जवान शहीद हुए थे। संस्थान के एक कर्मचारी की मौत हो गई थी। तीन आतंकियों को मार गिराया गया था।