जम्मू। शहर में मंगलवार को अष्टमी के दिन दर्दनाक हादसा हुआ। राजीव कॉलोनी के 15 वर्षीय नितिन की तवी नदी में डूबने से मौत हो गई। वह हरकी पौड़ी के पास दोस्तों संग नहा रहा था। इस दौरान पानी के तेज बहाव से गहराई में चला गया और डूब गया। किसी तरह उसे निकालकर जीएमसी पहुंचाया गया लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
नितिन सुबह दोस्तों के साथ बावे वाली माता मंदिर गया था। वहां से सभी दोस्त नहाने चले गए। अष्टमी के दिन हरकी पौड़ी के पास बड़ी संख्या में लोग साख प्रवाहित करने पहुंचे थे। इस बीच सभी दोस्त नदी में नहाने उतर गए। नहाते समय सभी को एहसास हुआ कि वे गहराई की तरफ जा रहे हैं। उन्होंने एक-दूसरे के हाथ पकड़े लेकिन नितिन का हाथ छूट गया और तेजी से गहराई की तरफ बह गया। जब तक उसके दोस्त कुछ समझ पाते तब तक वह डूबने गला। दोस्तों ने शोर मचाया तो वहां साख प्रवाहित करने पहुंचे लोग उनकी तरफ दौड़े। लोगों ने पुलिस और एसडीआरएफ को भी सूचित किया। जब तक बचाव दल मौके पर पहुंचा उससे पहले लोगों ने कड़ी मशक्कत कर उसे बाहर निकाल लिया था।
बताया जाता है कि जब नितिन को निकाला गया उस समय उसकी हालत गंभीर थी। वह बेसुध था। लोगों की मदद से उसे ऑटो से जीएमसी जम्मू पहुंचाया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिवार ने समय पर इलाज न मिलने का लगाया आरोप
जीएमसी पहुंचे नितिन के भाई अजय ने बताया कि नितिन घर से मंदिर गया था। उन्हें जानकारी नहीं थी कि वह वहां से हरकी पौड़ी चला गया है। हमें फोन आया कि नितिन तवी में डूब गया है। इस पर आनन-फानन में सभी वहां पहुंचे लेकिन तब तक उसे पानी से निकाल लिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जीएमसी में डॉक्टरों ने नितिन का समय पर उपचार नहीं किया। अस्पताल लाने पर उसकी सांसें चल रही थीं। जीएमसी प्रबंधन ने उसे निजी अस्पताल में नहीं ले जाने दिया। इमरजेंसी में भी परिवार के किसी सदस्य को जाने की अनुमति नहीं दी गई। इस पर परिवार के सदस्यों की जीएमसी के सुरक्षा कर्मियों के साथ बहस हुई। इस दौरान कुछ समय के लिए इमरजेंसी का गेट बंद कर दिया गया।
एक साल पहले ट्रेन में हुई थी पिता की मौत
एक साल पहले नितिन के पिता की एक पारिवारिक समारोह में जाते समय ट्रेन में अचानक से मौत हो गई थी। परिवार में नितिन के अलावा दो भाई, एक बहन और मां हैं। नितिन घर में सबसे छोटा था। अस्पताल परिसर में नितिन की मां पहुंची थीं जिनका रो-रोकर बुरा हाल था। वह बेसुध हालात में थी। वह किसी से बात भी नहीं कर पा रही थीं।