स्कूली बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा देने का दावा करने वाली सरकार गुरुजनों से बेगार करवा रही है। हालत यह है कि उन्हें 16 माह से वेतन नहीं मिला है, जिससे वे भयंकर आर्थिक परेशानियां झेेल रहे हैं।
शिक्षकों की लंबित मांगों पर जम्मू-कश्मीर यूनाइटेड स्कूल टीचर्स एसोसिएशन ने आंदोलन की चेतावनी दी है। दयालाचक में आयोजित एसोसिएशन के सांबा और कठुआ जिला के जोन स्तरीय पदाधिकारियों की बैठक में मांगें पूरी न होने पर सरकार को शिक्षकों का आक्रोश झेलने की चेतावनी दी गई है।
उन्होंने सरकार से पूछा है कि आखिर भूखे पेट वे बच्चों को शिक्षा देने का काम कैसे जारी रख सकते हैं? बैठक की अध्यक्षता करते हुए एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष हरि सिंह ने कहा कि जो शिक्षक देश का भविष्य तैयार करते हैं, उनका भविष्य खुद ही अधर में है।
वे खुद तो बिना वेतन मिले दूसरों के बच्चों को ज्ञान बांट रहे हैं, जबकि 15-16 माह से वेतन न मिलने से खुद वे अपने बच्चों की फीस नहीं जमा करवा पा रहे हैं।
वहीं, शिक्षा पर लंबे-चौड़े वादे करने वाली सरकार को न बच्चों और न ही गुरुजनों के भविष्य की कोई फिक्र है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय योजनाओं के तहत शिक्षक कार्यरत मुलाजिमों को पिछले सोलह महीनों से वेतन नहीं दिया गया है।
मास्टर ग्रेड शिक्षकों का वेतन भी सात महीनों से लंबित है। स्कूलों में मिड-डे मील के लिए शिक्षकों पर देनदारी का आंकड़ा लाखों में पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि गुणवत्तापरक शिक्षा का दावा करने वाली सरकार ने स्कूलों में अभी तक नि:शुल्क किताबों का वितरण नहीं किया है।
राजीव कुमार, जुल्फिकार अली, राज कुमार, मदन सिंह, किशोरी लाल आदि ने कहा कि सरकार स्कूली बच्चों और शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। लिहाजा अब कड़े संघर्ष का सामना करना होगा।