आपको बता दें कि निजामुद्दीन में हुई तब्लीगी जमात में श्रीनगर का एक व्यवसायी भी था। उसने दिल्ली, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के लिए ट्रेन, सड़क मार्ग और हवाई यात्रा भी की थी। अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि उनके संभावित पीड़ितों में जम्मू के एक अस्पताल में भर्ती एक डॉक्टर भी है, जोकि जिंदगी के लिए जूझ रहे हैं।
बता दें कि इस व्यवसायी की 26 मार्च को श्रीनगर के अस्पताल में मृत्यु हो गई थी। अधिकारियों ने कहा कि उसकी यात्रा के दौरान संपर्क में आए लोग संक्रमित हो सकते थे, इसी वजह से लगभग 300 लोगों को एकांतवास में रखा गया। जम्मू में वह व्यवसायी अपने डॉक्टर मित्र से मिला इसके बाद सांबा जिले की एक मस्जिद में एक धार्मिक मंडली को संबोधित भी किया। दोनों 16 मार्च तक एक साथ थे और एक लॉज में रुके थे।
16 मार्च को व्यापारी को संदेह हुआ कि वह कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुका है और उसके जरिए इसका प्रसार हो सकता हो तो वह श्रीनगर के लिए हवाई जहाज से रवाना हुआ। जहां से वह उत्तरी कश्मीर के सोपोर में लगभग 54 किलोमीटर दूर चला गया। दो दिन बाद वह सड़क मार्ग से फिर से श्रीनगर में अपने घर लौट आया।
एक अधिकारी ने कहा कि उन्होंने 21 मार्च को सीने में दर्द और सामान्य फ्लू की शिकायत की। इसके बाद उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। बाद में श्रीनगर के बाहरी इलाके सौरा के सुपर स्पेशियलिटी एसकेआईएमएस अस्पताल में ले जाया गया। हालांकि, उसकी हालत बिगड़ गई और उसे शहर के चेस्ट एंड डिजीज अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां 26 मार्च को उसकी मृत्यु हो गई।
तब्लीगी जमात में भाग लेने वालों के संपर्कों का पता लगाने के लिए देश भर के अधिकारियों ने कार्रवाई की है, जिसमें मलेशिया, सऊदी अरब और इंडोनेशिया के सैकड़ों लोग शामिल हैं। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि निजामुद्दीन पश्चिम में 1,033 लोगों को विभिन्न स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। इसके अलावा, इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है।