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निजामुद्दीन मरकजः जम्मू से 83 और कश्मीर से 772 लोग हुए थे शामिल, हजारों के संपर्क में आने की आशंका

Wed, 01 Apr 2020 02:44 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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निजामुद्दीन इलाके से जांच के लिए जाते लोग - फोटो : एएनआई
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दिल्ली में निजामुद्दीन दरगाह पर 18 मार्च को तब्लीगी जमात के जलसे में शामिल हुए जम्मू-कश्मीर के लोगों की तलाश तेज हो गई है। ऐसे 855 लोगों की सूची तैयार की गई है, जो या तो निजामुद्दीन के धार्मिक जलसे में शामिल हुए हैं या फिर शामिल होने वाले लोगों के संपर्क में रहे हैं। 50 पृष्ठ की इस सूची में जम्मू संभाग के 83 लोग हैं, जबकि बाकी कश्मीर के हैं।

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जलसे में शामिल कई लोगों के संक्रमित होने से हड़कंप मचा हुआ है। इस बीच कठुआ में देर शाम सात लोगों को चिह्नित कर उन्हें क्वारंटीन किया गया। यह सभी लोग निजामुद्दीन में ठहरे थे। वहां से लौटने के बाद यात्रा इतिहास छिपाकर वे परिवार के साथ रहे और लोगों से भी मिले। डीसी ओमप्रकाश भगत ने सैकड़ों लोगों की जान खतरे में डालने के आरोप में सातों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। जो क्वारंटीन किए गए हैं उनमें तीन जंगलोट, एक वार्ड नंबर दो कठुआ, एक चकदेशा सिंह, एक लखनपुर व एक कालीबाड़ी का है।

दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज में 18 मार्च को हुए तब्लीगी जमात के जलसे में शामिल होकर लौटे लोगों की तलाश करना जम्मू-कश्मीर प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। सूची मिलते ही प्रशासन इन लोगों की तलाश में जुट गया है। कुछ लोगों को चिन्हित किया गया है, लेकिन ज्यादातर लोगों का कोई पता नहीं है। जम्मू-कश्मीर में कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर इन लोगों की तलाश के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं। लोगों से खुद आगे आकर प्रशासन को सूचित करने की अपील की जा रही है।

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कुपवाड़ा के मोहम्मद सलीम ने बताया कि वह 17 मार्च को निजामुद्दीन में था

डिवकाम कश्मीर पीके पोले ने बताया कि जिला स्तर पर सभी डीसी को वास्तविक संख्या पता करने को कहा गया है। दो दिन के अंदर सभी से संबंधित जिलों के कंट्रोल रूम में यात्रा इतिहास भी बताने को कहा गया है। हालांकि, इस सूची के बारे में कोई भी अधिकारिक रूप से जानकारी नहीं दे रहा है।
 
सूत्रों के अनुसार करीब 1400 लोगों की निशानदेही की जा चुकी है, जो सीधे तौर पर या फिर किसी अन्य तरीके से जलसे में शामिल लोगों के संपर्क में आए थे। इनमें से 800 को क्वारंटीन किया जा चुका है, जबकि अन्य की तलाश की जा रही है। एक अधिकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के करीब 65 लोगों को दिल्ली में ही क्वारंटीन किया गया है। कई लोग हैं, जो यहां लौट चुके हैं। ये लोग कश्मीर के बांदीपोरा, पुलवामा, शोपियां, कुपवाड़ा, बारामुला और श्रीनगर जिलों के रहने वाले हैं।

सूची में शामिल कुपवाड़ा के मोहम्मद सलीम ने बताया कि वह 17 मार्च को निजामुद्दीन में था। वहां से राजस्थान चला गया था, जहां वह क्वारंटीन है। कुपवाड़ा के उपायुक्त अंशुल गर्ग ने बताया कि दिल्ली से जारी सूची के आधार पर 128 सर्विलांस टीमें जमात में शामिल होने वालों की तलाश कर रही हैं। अभी कई लोग अब तक यूटी से बाहर ही हैं। लौटने वालों में कुछ को श्रीनगर और कुछ को कुपवाड़ा में क्वारंटीन किया गया है। गर्ग का कहना है कि सूची में दर्ज कई नाम गलत भी हैं।

 

घाटी में मरने वाला पहला बुजुर्ग भी जलसे से लौटा था

जम्मू की जिला उपायुक्त सुषमा चौहान का कहना है कि सूची के मुताबिक कई लोगों का पता गलत है और कई लोग यहां हैं ही नहीं। प्रशासन सभी लोगों की शिनाख्त करके उन्हें क्वारंटीन कर रहा है। दोपहर तक ऐसे छह लोगों को ढूंढ निकाला गया था।

एक अधिकारी ने बताया कि चिंता की बात यह है कि कश्मीर घाटी में जो पहली मौत हुई थी, वह 65 वर्षीय बुजुर्ग भी तब्लीगी जमात के जलसे से लौटा था और पॉजिटिव पाए जाने से पहले वह करीब चार दिन बिना रोक-टोक घूमता रहा। अब यह पता लगाने का प्रयास किया रहा है कि कितने लोग उसके संपर्क में आए थे। अब तक जम्मू-कश्मीर में सामने आए पॉजिटिव मामलों में से 11 से अधिक ऐसे हैं, जो इस मृत बुजुर्ग के संपर्क में आए थे।
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विशेषज्ञों के अनुसार- समाज के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं यात्रा इतिहास छिपाने वाले

सरकार के प्रवक्ता रोहित कांसल ने कहा कि कोरोना वायरस के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए सकारात्मक रूप से कांटेक्ट ट्रेसिंग ही एक मात्र उपाय है। सोमवार को जम्मू, श्रीनगर, पुलवामा, शोपियां और राजोरी में पॉजिटिव मामलों या अभी तक लापता वाले मामलों के आसपास के कई क्षेत्रों को सील किया गया है। इससे कोरोना वायरस के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

जलसे से लौटे जम्मू-कश्मीर के अधिकतर लोग अपना यात्रा इतिहास छिपाकर विभिन्न हिस्सों में रह रहे हैं। इनकी शिनाख्त कर उन्हें क्वारंटीन करने के लिए अभियान चलाया गया है। जम्मू में भठिंडी, गुज्जर नगर, सुंजवां, जानीपुर इलाकों को पहले ही सील कर दिया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार जिन लोगों ने अपना यात्रा इतिहास छिपाया है और कई दिन तक छिपे रहे, वे समाज के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। ऐसे कई लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकते हैं लेकिन सबसे बड़ा खतरा यह है कि अगर इनमें कुछ लोग भी पॉजिटिव हुए और वे इतने दिन से समाज में घूम रहे हैं तो उनके संपर्क में आने वाले सैकड़ों लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं।
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