डेंगू के बाद स्वाइन फ्लू स्वास्थ्य महकमे के लिए चुनौती रहेगा। पारा गिरने के साथ नवंबर माह में इस फ्लू की आशंका बढ़ जाएगी। पिछले साल रियासत में रिकार्ड स्वाइन फ्लू के पाजिटिव मामले सामने आए थे।
इन मामलों में बढ़ोतरी के साथ संभाग स्तर पर स्थायी आइसोलेशन यूनिट की दरकार रहती है। इसके अलावा जीएमसी में लैब का निर्माण न होने से टेस्ट के लिए इस बार भी दूसरे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार पारा गिरने के साथ डेंगू के बाद स्वाइन फ्लू के आने की आशंका बढ़ जाएगी। स्वाइन फ्लू का एच1एन1 वायरस राज्य में कई लोगों की जान ले चुका है।
शहरी स्तर पर जीएमसी के चोपड़ा नर्सिंग होम में एयर वार्न संक्रमित बीमारी आने पर आइसोलेशन यूनिट स्थापित किया जाता है, लेकिन इस साल नर्सिंग होम में कैंसर वार्ड शुरू किया गया है।
स्वाइन फ्लू से घाटी ज्यादा प्रभावित रही है। यहां स्वाइन फ्लू के विस्थापित मामले भी तेजी से पहुंचते हैं। हालांकि अभी तक इस फ्लू से राहत है, लेकिन लैबोरेटरी और स्थायी आइसोलेशन यूनिट के इंतजाम नहीं हो पाए हैं।
जीएमसी के प्रिंसिपल डा. घनश्याम देव गुप्ता का कहना है कि स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों से निपटने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जाते रहे हैं। इसमें पीड़ित को अलग से आइसोलेशन यूनिट में रखा जाता है। इस बीच वीरवार को डेंगू का कोई पाजिटिव मामला सामने नहीं आया।
स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डा. बलजीत सिंह पठानिया के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में मच्छरों के खिलाफ सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं।