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कश्मीर में भी स्वाइन फ्लू के खतरे की घंटी

Tue, 15 Sep 2015 10:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
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डाक्टर्स एसोसिएशन कश्मीर (डाक) ने सोमवार को एच1एन1(स्वाइन फ्लू) के मामलों की संख्या में हाल में इजाफे को देखते हुए घाटी में वायरस के फैलने की आशंका पर जनता को आगाह किया है।
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डाक के अध्यक्ष और एच1एन1 विशेषज्ञ डा. निसार-उल-हसन ने कहा कि महाराष्ट्र और राजस्थान में एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) के मामलों के कारण होने वाली मौतों ने कश्मीर में भी खतरे की घंटी बजा दी है।

उन्होंने कहा कि पिछली बार कश्मीर में स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा एच1एन1 के वायरस की चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया था। इससे कई की जानें गई थीं।

डा. निसार के अनुसार वायरस की अनिश्चितता और बदलते व्यवहार के कारण उसकी गंभीरता का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। डा. निसार ने यह भी कहा कि फरवरी में जो वायरस फैला था, वह काफी घातक था।
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उन्होंने यह भी कहा कि स्किम्स की प्रयोगशाला इस वायरस पर निगरानी रखने में विफल रही है। उनके अनुसार घाटी में कभी भी यह वायरस दुबारा सक्रिय हो सकता है।

टीकाकरण की एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि टीकाकरण फ्लू से लोगों को बचाने के लिए सबसे अच्छा तरीका है। उनके अनुसार रोग नियंत्रण के लिए केंद्र (सीडीसी) द्वारा 2015-2016 फ्लू के लिए प्रत्येक व्यक्ति (छह माह के बच्चे से ऊपर तक) के लिए टीके की सिफारिश की है।

कहा है कि फ्लू का मौसम शुरू होने से पहले लोगों को आदर्श टीका लगाया जाना चाहिए। छह महीने से छोटे बच्चों को गंभीर फ्लू का खतरा अधिक होता है, लेकिन उन्हें फ्लू वैक्सीन नहीं लगाया जा सकता। इसलिए शिशुओं की देखभाल करने वालों के लिए वैक्सीन अनिवार्य है।
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