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जम्मू कश्मीर में स्वाइन फ्लू पर अलर्ट

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दिल्ली में स्वाइन फ्लू की दस्तक के बाद रियासत में सतर्कता बढ़ाई गई है। स्वाइन फ्लू के वायरस की चपेट में आने से जम्मू और कश्मीर में कई लोगों की जान जा चुकी है। रियासत के साथ लगते राज्यों में ताजा मामले सामने आने से स्वास्थ्य महकमे में सभी एहतियात बरते जा रहे हैं।
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संभाग स्तर पर जीएमसी के चोपड़ा नर्सिंग होम में आइसोलेट यूनिट बनाना गया है। जिला स्तर पर भी आइसोलेट वार्ड स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य निदेशालय जम्मू ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से टैमी फ्लू टैबलेट की खेप मांगी है।

स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डा. बलजीत सिंह का कहना है कि स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए सभी तैयारियां की जा रही हैं। इसमें पीड़ितों की चिकित्सा के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। रियासत में फिलहाल स्वाइन फ्लू का कोई नया मामला सामने नहीं आया है।
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छोटी सा रोग हो सकता स्वाइन फ्लू

मामूली सा नियमित बुखार, खांसी, गले में खराश को नजरअंदाज न करें। यह स्वाइन इनफ्लूएंजा फ्लू के लक्षण हो सकते हैं। स्वाइन फ्लू का एच1एन1 नामक वायरस मानव शरीर के कई अंगों पर हमला करके उनकी शारीरिक क्षमता को खत्म कर देता है, जिससे पीड़ित की जान चली जाती है।

स्वाइन इनफ्लूएंजा वायरस मैक्सिको में मानवों के  बीच महामारी का कारण बना। इसने युनाइटेड स्टेट्स और कनाडा सहित अन्य देशों के बाद भारत में दस्तक दी। यह वायरस हवा में प्रभावित तत्वों द्वारा मानव से मानव में हस्तांतरित होकर बड़ी तबाही मचा सकता है।

लक्षण
1. छोटे रोगों से अचानक सेहत बिगड़ना
2. नियमित बुखार, खांसी, गले में खराश, डायरिया, उल्टी, सांस लेने में कठिनाई होना
--बचाव--
1. सादे पानी को पीएं, पोषणयुक्त खाना खाएं
2. लक्षणों से प्रभावित व्यक्ति अन्य लोगों से दूरी रखें
3. खांसते अथवा छींकते समय अपने मुंह एवं नाक को रुमाल से ढकें
5. पीड़ित को घर पर ही रखें और दूसरे लोगों के संपर्क में न लाएं
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2009 में इस रोग से हुई थी मौतें

उल्लेखनीय है कि जम्मू के बिश्नाह क्षेत्र के खैरी सरोर गांव के एक निवासी के दिसंबर, 2009 को स्वाइन फ्लू से मौत हो गई थी। इस चालीस वर्षीय संदिग्ध पुरुष मरीज को निमोनिया की शिकायत पर जीएमसी में भर्ती कराया गया था। इससे पूर्व सोरा, श्रीनगर में एक महिला मौत की भी इस वायरस की चपेट में आने से जान चली गई थी।

उस समय जम्मू संभाग में 60 से ज्यादा लोग स्वाइन फ्लू से पाजिटिव पाए गए थे, जिन्हें तत्काल इलाज दिया गया, लेकिन कई साल बाद रियासत में एक बार फिर स्वाइन फ्लू ने दहशत बना दी है। राज्य में रोजाना एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और अन्य यात्री वाहनों से हजारों लोगों की आवाजाही होती है।

इसमें किसी पीड़ित के संपर्क में रहने से इस फ्लू के दूसरे में पहुंचने की आशंका ज्यादा रहती है। संदिग्ध पीड़ितों के खून और थूक के नमूने जांच के लिए दिल्ली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आफ कम्यूनिकेवल डिसीज में भेजे जाते हैं। जीएमसी के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल के अनुसार स्वाइन फ्लू को लेकर कर्नल चोपड़ा नर्सिंग होम में वैकल्पिक इंतजाम किए गए हैं।

हालांकि रियासत में ऐसे गंभीर संक्रमित बीमारियों से निपटने के लिए उपयुक्त आइसोलेट यूनिट स्थापित नहीं है। ऐसे यूनिटों में अलग से वेंटिलेटर, आक्सीजन प्लांट, खून और थूक के सैंपल को विशेष किट, ड्यूटी पर कर्मियों को पर्सनल प्रोटक्शन को विशेष संसाधन आदि सामग्री की जरूरत होती है।
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