जतवाल के छन्न काना गांव के ग्रामीण रविंद्र कुमार ने बताया कि उनकी फसल को जंगली जानवर नुकसान पहुंचा रहे थे। वह रात को खेत जा रहा था। इस दौरान रेलवे पुल के नीचे पहुंचने पर उसने कुछ आवाज सुनी तो टॉर्च से देखा चार लोग सेना की वर्दी में थे। उनके पास पिट्ठू बैग और कंधे पर बंदूकें टंगी थीं।
आवाज लगाने पर संदिग्धों ने कोई जवाब नहीं दिया। वह वहां से भागकर घर पहुंचा और पिता को सारी बात बताई। बाद में उन्होंने घगवाल थाने में थाना प्रभारी राकेश शर्मा को इसकी सूचना दी। पुलिस व एसओजी ने क्षेत्र के छन्न काना, जतवाल व आसपास के क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाया।
संवेदनशील हैं सीमा से लगते इलाके
सीमा से सटे इलाके बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। आतंकी घुसपैठ कर इन इलाकों से हाईवे पार कर जंगल क्षेत्र में पहुंच जाते हैं। पूर्व की घटनाओं को देखें तो घुसपैठ कर आने वाले आतंकियों को उनके ठिकानाें तक पहुंचाने के लिए बाकायदा गाइड होते हैं, लेकिन सीमा पर सुरक्षा बलों की कड़ी चौकसी से घुसपैठ पर अंकुश लगा। बाद में सीमा पर सुरंगों के माध्यम से घुसपैठ होने लगी। एक बार फिर से सुरक्षा एजेंसियों के संदेह हो रहा है कि कहीं सीमा पर कोई सुरंग तो नहीं, जिसके रास्ते से घुसपैठ हो रही है। उधर बीएसएफ के अधिकारियों का कहना है कि सीमा से घुसपैठ होना मुमकिन नहीं है।
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