फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डेंगू के डंक की बढ़ती जा रही जम्मू में दहशत

Thu, 17 Sep 2015 11:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
विज्ञापन
विज्ञापन
डेंगू के डंक की दहशत बढ़ रही है। शहर के अस्पतालों में संदिग्ध बुखार के मरीजों का आना जारी है। जीएमसी की माइक्रोबायोलॉजी लैबोरेटरी में ही अकेले 18 मरीजों के खून के सैंपलों की रिपोर्ट आना बाकी है। एसएमजीएस, सरवाल और गांधीनगर अस्पतालों में संदिग्ध मरीजों के सैंपल लिए जा रहे हैं।
विज्ञापन


इनमें कई को उपचार दिया जा रहा है। जीएमसी के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल का कहना है कि संदिग्ध बुखार के मरीजों का आना जारी है, लेकिन अभी दर्जन से अधिक मरीजों की रिपोर्ट का इंतजार है। वायरल बुखार के पीड़ितों को उचित इलाज दिया जा रहा है।

जम्मू में अब तक पांच मामले पाजिटिव आ चुके हैं, लेकिन इनकी संख्या बढ़ सकती है। जीएमसी के अलावा जिला अस्पताल कठुआ, जिला अस्पताल सांबा, सरवाल और गांधीनगर अस्पताल में कर्मियों को एलिजा टेस्ट के लिए प्रशिक्षण दिया गया है।
विज्ञापन


इससे पहले यह सुविधा सिर्फ जीएमसी की माइक्रोबायोलाजी लैब तक ही सीमित थी, लेकिन जिला स्तर से अधिकांश पीड़ित जीएमसी ही पहुंच रहे हैं। शहर की निजी लैबों में भी संदिग्ध बुखार के पीड़ित सैंपल जांच के लिए पहुंच रहे हैं।

अस्पतालों में आने वाले अधिकांश मरीज निजी लैबों की रिपोर्ट ला रहे हैं। इसके अलावा मच्छरों के पनपने वाले संवेदनशील क्षेत्रों में एंटी लारवा स्प्रे का छिड़काव और फॉगिंग की जा रही है। गांधीनगर अस्पताल के अधीक्षक डा. यूनुस चौधरी के अनुसार अस्पताल में संदिग्ध बुखार के मरीज पहुंच रहे हैं, लेकिन अभी राहत यह है कि यहां कोई डेंगू का पाजिटिव मामला सामने नहीं आया है।

वर्ष 2014 में डेंगू से राहत रही थी, लेकिन वर्ष 2013 में डेंगू के करीब चार सौ पाजिटिव मामले सामने आए थे। उस समय हालत यह हो गई थी कि आम लोगों में डेंगू की दहशत को कम करने के लिए सरकार को अक्तूबर 2013 में निजी लैबों में डेंगू बुखार की जांच के लिए रैपिड टेस्ट (एनएस1) पर प्रतिबंध लगाना पड़ा था।

एलिजा राइडर टेस्ट (1 जीएम) में ही डेंगू के पाजिटिव होने की पुष्टि होती है। रैपिड टेस्ट में अन्य बुखार से डेंगू पाजिटिव आ जाता है। एडिस एजिप्ती मच्छरों के अंडों से डेंगू के मच्छर पैदा होते हैं। डेंगू के डंक से शरीर में प्लेटलेट्स की भारी कमी हो जाती है।

जिससे शरीर के विभिन्न हिस्सों में अचानक तेज दर्द होना, 105-107 डिग्री तक हाईग्रेड बुखार होना, मांसपेशियों में दर्द, नाक, मुंह और भीतरी हिस्सों से खून का रिसाव होना शुरू हो जाता है। मरीज को समय पर उचित इलाज न मिलने से उसकी जान चली जाती है।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें