फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एलओसी के आसपास संदिग्धों की फौज

विज्ञापन
विज्ञापन
राज्य की नियंत्रण रेखा पर सैन्य ठिकानों के आसपास संदिग्धों का मिलना आम हो गया है। जो सेना की सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकते हैं। पिछले एक साल पर नजर डालें तो एलओसी से सटे सैन्य ठिकानों और सैन्य शिविरों के आसपास सौ से अधिक संदिग्ध पकड़े गए हैं।
विज्ञापन


पकड़े जाने वालों में अधिकतर खुद को मानसिक रूप से कमजोर और कुछ भूल कर पहुंच जाने की बात करते हैं। सेना ऐसे लोगों को आए दिन पकड़ रही है। अब पुलिस के साथ बात भी की जा रही है कि ऐसे लोगों की पहचान और इनको सैन्य ठिकानों तक पहुंचने से रोका जाए। 

सबसे ज्यादा संदिग्ध पुंछ जिले के मेंढर इलाके से पकड़े गए हैं। पिछले एक साल में यहां एलओसी के पास करीब 20 संदिग्ध लोग सेना ने पकड़े। इनको सेना ने पकड़ा और फिर पुलिस को सौंप दिया। इतने ही लोग पुंछ में भी पकड़े गए। इसके बाद राजोरी जिले के झंगड़, सेरी का इलाका आता है।
विज्ञापन


यहां सेना ने पिछले एक साल में 10 से अधिक संदिग्ध लोगों को पकड़ा। बारामुला के उड़ी, सोपोर, पटन इलाके की एलओसी के पास भी 30 से अधिक संदिग्ध लोग पकड़े गए। सेना ने इन्हें पकड़ कर पुलिस को सौंप दिया। कुल मिलाकर राज्य के विभिन्न जिलों की एलओसी के पास सेना ने पिछले एक साल में 100 के करीब संदिग्ध लोगों को पकड़ा और फिर पुलिस को सौंपा।
विज्ञापन

सेना के लिए मुसीबत और खतरा

ऐसे लोगों का पकड़ा जाना सेना के लिए आए दिन मुसीबत बनता है और खतरा भी। ऐसे लोगों का एलओसी तक पहुंच जाना सेना की सुरक्षा में सेंध लगा सकता है। पुलिस की माने तो घूमने का हक किसी को है, लेकिन कोई खास इरादे से अगर एलओसी पर जाए तो उस पर निगरानी की जाती है।

पकड़े जाने वाले लोगों के पास तीन से चार तरह के पहचान पत्र बरामद हो रहे हैं। इसमें अलग-अलग राज्यों और इलाकों का पता रहता है। खुद को मानसिक तौर पर यह लोग कमजोर बताते हैं। कुछ खुद को भटक कर वहां पहुंच जाने का कारण बताते हैं। सेना इन्हें पकड़ने के बाद पुलिस को सौंप देती है।

पुंछ के एसपी जेएस जोहर और राजोरी के एसएसपी हसीब मुगल का कहना है कि इनके पकड़े जाने के बाद पहचान की जाती है। मानसिकता जांचने के लिए मेडिकल कराया जाता है। कोई ढोंग करता पाया जाए तो कानूनी कार्रवाई की जाती है।

बेशक पिछले एक साल में इतने लोग पकड़े होंगे, लेकिन इनकी जांच करने के बाद ऐसा एक भी मामला सामने नहीं आया जो जासूसी करने आया हो। पकड़े जाने वालों में 80 फीसदी से अधिक लोग बाहरी राज्यों के हैं। सूत्रों की मानें तो सेना इनको पकड़ने के बाद 24 घंटे तक पूछताछ करती है। इसके बाद पुलिस को सौंपा जाता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें