रोजी-रोटी की तलाश में कश्मीर गए राज मिस्त्री सुरेंद्र कुमार के परिवार वाले जल तांडव की खबर से काफी चिंतित थे। रविवार को उसके घर पहुंचने पर सभी ने राहत की सांस ली। हालांकि कश्मीर की जो तस्वीर सुरेंद्र ने बयां की, उसे सुनकर हर कोई सहम गया।
श्रीनगर में आई बाढ़ से बचकर गत शाम सुरेंद्र घर पहुंचा। उसके अनुसार, पानी का बढ़ता जलस्तर देखकर उसे कुछ समझ नहीं आया कि क्या करे। जब पहली मंजिल तक पानी पहुंचा, तो सभी घबराने लगे। देखते-देखते पानी दूसरी मंजिल की छत तक पहुंच गया।
हर तरफ चीख-पुकार मची थी। लोग बचाने के लिए चिल्ला रहे थे, लेकिन बचाने वाला कोई दिखाई नहीं दे रहा था। बच्चे, बूढे़ और महिलाएं बेबसी में बस चिल्लाए जा रहे थे। इस बीच ग्यारह सितंबर को सेना की ओर से कश्तियों द्वारा लोगों को निकालने का प्रयास शुरू हुआ।
इस तरह सभी श्रीनगर एयरपोर्ट तक पहुंचे। इसके बाद एक साथी ने कहा कि रेलवे लाइन से होते हुए आगे बढ़ते हैं। वीरवार को सुबह छह बजे श्रीनगर एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन पहुंचे। वहां से पैदल ही करीब 70 किलोमीटर का सफर तय कर अनंतनाग रेलवेे स्टेशन पहुंचे।
वहां से सभी बनिहाल तक आए। वहां सेना की ओर से एक कच्चा मार्ग निकाला गया था। पांच किलोमीटर पैदल सफर करने के बाद हाईवे पर पहुंचे, जहां सेना ने खाना खिलाया और उधमपुर पहुंचाया। इसके बाद हमारी जान में जान आई। सुरेंद्र ने कहा कि श्रीनगर में सेना की भूमिका की जितनी तारीफ की जाए कम है। जवान खुद भूखे रहे, लेकिन लोगों को खाना खिला कर वहां से निकाला।