बैनीसंगम से शुरू होकर उधमपुर पहुंचने वाली मां गंगा की बड़ी बहन कही जाने वाली देविका नदी आज लुप्त होने की कगार पर है। यदि ऐसा हुआ तो इसमें फैले प्रदूषण का सबसे बड़ा हाथ होगा।
जिला प्रशासन द्वारा कई बार विभिन्न योजनाएं चलाकर देविका को प्रदूषण मुक्त करने का प्रयास किया गया पर इसमें प्रशासन पूरी तरह असफल रहा है। पूराणों में लिखा है कि जब गंगा नदी में लोगों के पाप की मात्रा अधिक हो जाती है तो स्वयं गंगा पवित्र देविका नदी में आकर अपने को पाप मुक्त करती हैं। एक मान्यता यह भी है कि देविका नदी में बहाई जाने वाली अस्थियां कुछ ही देर में लुप्त हो जाती हैं।
पर देविका की इस पवित्रता पर प्रदूषण का ग्रहण लग चुका है। इस वजह से आज देविका लुप्त होने के कगार पर है। इस नदी में पूरे शहर की गंदगी नालों के जरिए आती है। कुछ माह पहले केंद्र से आई टीम ने देविका के जल में प्रदूषण की जांच की।
जांच में पाया गया कि देविका का पानी पीने व नहाने के लिए पूरी तरह से असुरक्षित है। हालांकि केंद्र को जिला प्रशासन द्वारा देविका की सफाई व सरंक्षण के लिए एक प्रोजेक्ट बनाकर भी भेजा गया है पर केंद्र सरकार द्वारा प्रोजेक्ट की लागत ज्यादा होने के कारण इसे नामंजूर कर दिया गया। इससे पहले साल 2008 में देविका नदी के किनारों पर 7 करोड़ की लागत से प्रोटेक्शन वाल का निर्माण भी किया गया पर यह भी गंदगी रोकने में नाकम रही।