केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में खासतौर पर जम्मू संभाग में बढ़ता चिट्टे (हेरोइन) का नशा युवाओं को आत्महत्या के लिए प्रेरित कर रहा है। आत्महत्या के कई मामलों में पाया गया है कि मृतक हेरोइन आदि नशे से पीड़ित थे और डिप्रेशन में आकर जान दे दी। इन सभी मामलों में कहीं न कहीं पीड़ित मानसिक रोग से भी पीड़ित होते हैं। डॉक्टरों के अनुसार सामान्य व्यक्ति के मुकाबले नशे करने वाले लोगों में 20 प्रतिशत तक आत्महत्या की आशंका बढ़ जाती है।
भविष्य में नशा बढ़ने की सूरत में आत्महत्या के मामलों में वृद्धि हो सकती है। इसमें अधिकांश युवा चपेट में आएंगे। वहीं, जम्मू संभाग के दस जिलों में जहरीला पदार्थ निगलने के मामलों में जिला उधमपुर सबसे ऊपर है।
डॉक्टरों के अनुसार आत्महत्या के मामले 80 प्रतिशत तक डिप्रेशन से जुड़े होते हैं। ताजा मामलों में देखा जा रहा है कि समाज में बढ़ता नशे का चलन युवाओं को आत्महत्या के लिए प्रेरित कर रहा है। डिप्रेशन और दूसरे कारणों से युवा अपनी जीवन लीला समाप्त कर रहे हैं। आत्महत्या के मामलों में सबसे अधिक जहरीला पदार्थ खाया जा रहा है। इसके अलावा फंदा लगाना, खुद को जलाना, डूबना और ट्रेन आदि के आगे कूदने का रास्ता अपनाया जाता है।
साइकाइटरी अस्पताल जम्मू में कार्यरत मनोचिकित्सक डॉ. राकेश बनाल ने बताया कि नशा भी आत्महत्या के लिए बड़ा कारण बन रहा है। नशे में लिप्त होकर अधिकांश युवा डिप्रेशन में जा रहे हैं। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के मुताबिक विश्व में हर साल करीब आठ लोग आत्महत्या कर रहे हैं। इसमें 17 प्रतिशत भारत से हैं। यहां एक घंटे में एक छात्र आत्महत्या कर रहा है।
इसमें बड़ी संख्या में आत्महत्या के मामले रिपोर्ट ही नहीं होते हैं। युवाओं में आत्महत्या के लिए 15 से 30 आयु वर्ग अधिक प्रभावित हो रहा है। खासतौर पर विद्यार्थियों में बढ़ता यह चलन चिंता का विषय है। नशे के अलावा आत्महत्या के लिए अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसमें विद्यार्थी स्तर पर अभिभावकों द्वारा उनकी क्षमता से अधिक उन पर दबाव बनाना भी है। साइकाइटरी अस्पताल के ओपिऑयड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (ओएसटी) केंद्र में एक हजार के करीब मरीज पंजीकृत हैं। इसमें 90 प्रतिशत तक हेरोइन से पीड़ित हैं।
इन उपायों को अपनायाजा सकता है
- समाज में नशे की आपूर्ति को खत्म करने पर काम किया जाए
- खासतौर पर विद्यार्थियों में नशे के बचाव को लेकर जागरूकता बढ़ाई जाए
- नशे को जड़ से खत्म करने से लिए सभी उपाय अपनाए जाएं
- बच्चों को तनाव से दूर रखने के लिए पारिवारिक समर्थन को बढ़ावा दिया जाए
- अभिभावक अपने बच्चों पर क्षमता के मुताबिक ही परिणाम की अपेक्षाएं करें और उनका तनाव न बढ़ाएं
स्वास्थ्य विभाग के इमरजेंसी रूम में जहरीला पदार्थ निगलने के रिपोर्ट हुए मामले
जिला वर्ष 2022 वर्ष 2023 (जनवरी से अगस्त तक)
उधमपुर 180 146
राजोरी 131 109
पुंछ 89 65
कठुआ 89 68
जम्मू 83 49
डोडा 31 62
किश्तवाड़ 54 18
रामबन 26 38
रियासी 12 13
सांबा 58 33