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एग्जाम रिजल्ट के बाद इन बातों से परेशान है स्टूडेंट

Mon, 18 May 2015 01:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
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पहले एग्जामिनेशन एंजाइटी और अब परीक्षा नतीजों का डर। पिछले कुछ समय से विद्यार्थियों पर तनाव हावी रहा है। दसवीं और बारहवीं के परीक्षा परिणामों के नतीजों को लेकर विद्यार्थियों की दिलों की धड़कनें भी तेज हो गई हैं। सफलता पाने के लिए देवी-देवताओं के दरबार में भी हाजिरी लगाई जा रही है, लेकिन तपिश बढ़ने से विद्यार्थियों में तनाव भी बढ़ेगा। मनोचिकित्सकों के अनुसार तनाव से असफल विद्यार्थियों ने नकारात्मक सोच बढ़ती है।
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बोर्ड परीक्षाओं के साथ स्नातक नतीजों को लेकर भी विद्यार्थियों में उत्सुकता के साथ तनाव हावी है। साइक्रेटरी अस्पताल के एचओडी डा. जगदीश थापा के अनुसार अभिभावकों की अपेक्षाओं पर खरा न उतरने वाले विद्यार्थियों को ज्यादा तनाव झेलना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में बच्चों पर ज्यादा दबाव रहता है। इनमें कई बच्चों का नतीजे की सूचना मिलते ही रोना शुरू होना, घबराहट, चिल्लाना, हाथ पांव फूलने जैसे लक्षण भी रहते हैं।

परीक्षाओं के नतीजों की जब भारी आती है तो कई बच्चों को असफल होने का डर सताने लगता है। इस डर में तनाव की घुसपैठ भी साथ में हो जाती है। इसमें कुछ बच्चे भारी तनाव में चले जाते हैं, जो उनके लिए यह परिस्थितियां घातक होती हैं। इन मामलों में शहरी इलाकों के विद्यार्थी ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इसका मुख्य कारण यहां हर स्तर पर प्रतिस्पर्धा ज्यादा होना है।
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हर कोई अभिभावक अपने लाडले या लाडली के चेहरे में डाक्टर और इंजीनियर देखकर उसी तरह की अपेक्षाएं लगा लेते हैं। लेकिन वे बच्चे की क्षमता को जानने से चूक जाते हैं। मनोचिकित्सकों के अनुसार नतीजों को लेकर भीषण गर्मी तनाव को और बढ़ा देगी। उल्लेखनीय है कि जम्मू समर जोन में दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं में हजारों विद्यार्थी बैठे हैं।
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1. अभिभावक बच्चों से परीक्षाओं के बारे में जानने की कोशिश करें
2. बच्चों की खामियों को दूर करने के प्रयास करें
3. असफल रहने पर डांट डपट के बजाय प्रोत्साहित करें
4. नतीजे खराब आने पर बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान दें
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