विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा विभाग में एमएड की सीटों की कमी से विद्यार्थियों में निराशा है, जिसको लेकर उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर न सिर्फ उनके साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया, बल्कि मौजूदा सीटों में 10 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का आरोप भी लगाया।
उल्लेखनीय है कि विवि के दूरस्थ शिक्षा विभाग के पास एमएड की कुल 1000 सीटें हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत सीटें जम्मू प्रांत और 10 प्रतिशत सीटें बाहरी विद्यार्थियों के लिये आरक्षित हैं।
एमएड के दाखिले के बारे में पता करने विवि के दूरस्थ शिक्षा विभाग में पहुंची छात्रा रोहिणी शर्मा ने निराशा प्रकट करते हुए कहा कि एक तो पहले ही विभाग के पास सीटों की कमी है और उस पर से भी 10 प्रतिशत सीटें आरक्षित होती हैं।
कश्मीर विश्वविद्यालय में 3600 सीटें, जम्मू में मात्र 1000
एक अन्य छात्र संजीव रमेश कुमार ने कहा, हमें कहा जाता है कि हमारे साथ कोई भेदभाव नहीं हो रहा है लेकिन इसे भेदभाव नहीं तो और क्या कहेंगे कि कश्मीर विश्वविद्यालय के पास एमएड की 3600 से भी अधिक सीटें हैं।
जबकि जम्मू में कुल 1000 सीटें और वे भी यहां के छात्रों को पूरी नहीं मिल पाती हैं। दीपिका, नीतीश टंडन और विनोद भोला ने कहा कि वे भी एमएड के दाखिले का पता करने आए थे लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी।
हर बार की तरह इस बार भी छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण छात्रों को नहीं लग रहा है कि उन्हें इस बार भी दाखिला मिल पाएगा।
छात्र प्राइवेट कोर्स को दे रहे है तहरीज
उल्लेखनीय है कि जम्मू विश्वविद्यालय में एमएड के रेगूलर कोर्स की फीस ज्यादा होने के कारण छात्र डीडी के माध्यम से ही एमएड करने में ज्यादा रुचि दिखाते हैं।
इस संदर्भ में जब विवि के एक वरिष्ठ अधिकारी से बात की तो उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष डिस्टेंस एजूकेशन में एमएड की 500 सीटें थीं।
अब इन सीटों को बढ़ाकर 700 कर गई लेकिन इस वर्ष ये सीटें कुल 1000 हैं। उन्होंने कहा कि 10 प्रतिशत सीटें ही जम्मू प्रांत से बाहर के छात्रों के लिए हैं और इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता है।