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बैंकों का दो सौ करोड़ दबाए बैठी हैं 40 फर्म

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रियासत के 40 व्यापारिक और औद्योगिक संगठनों ने बैंकों का 208 करोड़ रुपया दबा लिया है। बैंकों ने इस राशि को निकालने के लिए अदालत में सूट फाइल किया है, लेकिन रियासत का अपना संविधान और नियम होने के कारण बैंक उक्त राशि को निकालने में अब तक सफल नहीं हो पाए हैं।
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खास बात यह है कि सूची में शामिल 40 फर्म ऐसी हैं, जिन पर एक करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया है, जबकि उससे नीचे वाली रकम वाले बकायेदारों की सूची जारी नहीं हुई है।

जम्मू प्रोविंस बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी अरुण गुप्ता कहते हैं कि इन लोगों के खिलाफ अदालत में भले ही केस हैं, लेकिन स्टे ले लेने से वसूली नहीं हो पा रही।
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ऋण वसूली में सबसे ज्यादा जेएंडके बैंक फिसड्डी

बैड लोन वाले इन औद्योगिक और व्यापारिक संगठनों से ऋण वसूली में सबसे ज्यादा जेएंडके बैंक असफल रहा है। इन 40 संस्थानों में से जेएंडके बैंक के 28, पंजाब नेशनल बैंक के छह, स्टेट बैंक आफ इंडिया और पंजाब एंड सिंध बैंक के 2-2 और इंडियन ओवरसीज बैंक और सिंडिकेट बैंक के 1-1 अकाउंट होल्डर हैं।

वैसे तो यह एक करोड़ से ज्यादा वाले बैड लोन की सूची है, लेकिन इसमें सबसे ज्यादा बकाया 46.12 करोड़ एक इंडस्ट्रीज के नाम है, जिसने स्टेट बैंक के 22.32 करोड़ और पंजाब नेशनल बैंक के 22.80 करोड़ दबा रखे हैं।

इसके अलावा एक इंडस्ट्री ने जेएंडके बैंक का 21.92 करोड़ अदा करना है। सात इंडस्ट्रीज ऐसी हैं, जिनका दस करोड़ से ऊपर बकाया है। यदि राशि के अनुसार देखें तो सबसे ज्यादा 77.98 करोड़ रुपया जेएंडके बैंक का है।
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एसबीआई भी नहीं कर पाता ऋण वसूली

इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक का 48.96 करोड़, स्टेट बैंक आफ इंडिया का 33.90 करोड़, इंडियन ओवरसीज बैंक का 15.37 करोड़, सिंडिकेट बैंक का 14.69 करोड़ और पंजाब एंड सिंध बैंक का 7.96 करोड़ शामिल है।

क्यों नहीं हो पाती वसूली?

बैंकों को ऋण वसूली के लिए देशभर में सरफासी एक्ट का अधिकार है, जिसके तहत वे ऋण लेने वाले की संपत्ति कुर्क करते हैं। साथ ही बंधक के रूप में रखी जमीन और अन्य अचल संपत्तियों पर कब्जा कर उसकी नीलामी करते हैं लेकिन रियासत में सरफासी एक्ट लागू नहीं होने के कारण बैंकों को यहां समस्या हो रही है।

बैंकों का कहना है कि ऋण लेने वाला व्यक्ति अदालत में केस होने पर स्टे ले लेता है। जम्मू कश्मीर में सरफासी एक्ट लागू करने के लिए विधानसभा में संविधान संशोधन करना होगा। इसके लिए बैंकों ने सरकार को लिखा है, लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
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