पुलवामा हमले के बाद देश में उपजे आक्रोश के बीच सरकार ने अलगाववादियों पर शिकंजा कसकर पाक को कड़ा संदेश दिया है। साथ ही हुर्रियत के लोगों को भी सख्त चेतावनी देने की कोशिश की है कि अब सरकारी खर्चे पर पाकिस्तान का गुणगान नहीं चलेगा।
दरअसल पुलवामा हमले के बाद पूरे देश के लोगों में जबर्दस्त उबाल है। लोगों में आतंकी संगठनों के साथ ही पाकिस्तान परस्त अलगाववादियों को लेकर भी गुस्सा है। इसी गुस्से को देखते हुए केंद्र सरकार ने पाकिस्तान तथा अलगाववादियों को करारा जवाब देने की रणनीति बनाई। केंद्र की ओर से राज्य सरकार को इन अलगाववादियों की सुरक्षा की समीक्षा करने की हिदायत दी गई।
टेरर फंडिंग में अलगाववादियों का नाम आ चुका है। हुर्रियत (जी) व हुर्रियत (एम) से जुड़े कई अलगाववादी नेताओं को एनआईए टेरर फंडिंग मामले में गिरफ्तार कर चुकी है। अब ये तिहाड़ जेल में पिछले एक साल से अधिक समय से हैं। महिला अलगाववादी आसिया अंद्राबी पर भी एनआईए शिकंजा कस चुकी है। घाटी में पत्थरबाजी की घटनाओं के पीछे भी अलगाववादियों का हाथ बताया जाता रहा है।
अलगाववादियों की ओर से लगातार पाकिस्तान का राग अलापा जाता रहा है। कश्मीर मुद्दे का हल करने की बात हो या फिर घाटी में शांति बहाली की बात, हर समय पाकिस्तान को बातचीत में शामिल किए जाने की वकालत की जाती रही है। इससे पिछले 30 साल से घाटी में अशांति, खून खराबा तथा अलगाववाद की भावना लगातार बढ़ती जा रही है। केंद्र सरकार ने इन्हें जड़ से समाप्त करने की दिशा में सख्ती से फैसला लेने का फैसला किया। अलगाववादियों की सुरक्षा पर पुलिस विभाग का एक बड़ा अमला लगा हुआ है।
अलगाववादियों के सरकारी खर्च पर उठते रहे हैं सवाल
अलगाववादियों की सुरक्षा तथा सुविधाओं पर होने वाले सरकारी खर्च को लेकर समय-समय पर सवाल खड़े होते रहे हैं। राज्य विधानसभा तक में इस मुद्दे पर हंगामा हो चुका है। सरकार में रहते हुए भी भाजपा ने अलगाववादियों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। पूर्व वित्त राज्य मंत्री और निर्दलीय विधायक पवन गुप्ता ने भी इन पर होने वाले सरकारी खर्च का सरकार से ब्योरा मांगा।