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यहां आयुर्वेद की आड़ में बेची जा रही भांग

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राज्य में नशे के व्यापार में रोज नए उत्पाद शुमार हो रहे हैं। प्रतिबंध के बावजूद पड़ोसी राज्य पंजाब से कई ऐसे उत्पाद राज्य में खपाए जा रहे हैं, जिन्हें आयुर्वेद के नाम पर नशेड़ियों तक पहुंचाया जा रहा है।
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इन्हीं में शामिल है मुनक्का युक्त वटी, जिसके पैकेट पर एक रुपया मूल्य दर्शाया गया है, जबकि नशे की डोज के तौर पर इसे पांच गुना अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है।

इतना ही नहीं इसके पाउच पर आयुर्वेदिक औषधि भी लिखा है और कैनाबिस सत्व (भांग सत्व) भी लिखा है। इस तरह आयुर्वेदिक दवाइयों की आड़ में न सिर्फ विभाग को बेवकूफ बनया जा रहा है, बल्कि नशे के धंधे को एक नए तरीके से अंजाम दिया जा रहा है।
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ऐसा नहीं है कि यह उत्पाद केवल नशे के लिए ही बने हों, लेकिन इनके अधिकतर ग्राहक नशेड़ी हैं। युवाओं को नशे की लत लगाने में ऐसे उत्पाद सहायक हैं, जिसे रोक के बावजूद नशे के विकल्पों पर नकेल कसना टेढ़ी खीर है।

यह आयुर्वेदिक उत्पाद पड़ोसी राज्यों में आसानी से उपलब्ध है। इसके चलते कई पान की दुकानों में भी आसानी से मिल जाते हैं। इसके लेबल पर न तो एक्सपायरी डेट अंकित होता है और न ही पैकिंग डेट। यहां तक की बैज नंबर भी नहीं है।
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मंजन की निराली कहानी

शहर के बाजारों में उपलब्ध मंजन की कहानी भी निराली है। इस मंजन के लती लोग हर उम्र के हैं। दिन में कई बार इसका प्रयोग कर दांतों की सफाई के साथ ही नशे को भी सिर चढ़ा रहे हैं।

सस्ते होने के चलते ऐसे उत्पादों के ज्यादातर शिकार श्रमिक और विद्यार्थी होते हैं। बाकायदा इसकी पैकिंग पर ड्रग लाइसेंस और एक्साइज लाइसेंस भी अंकित है, लेकिन एक्सपायरी और बैच नंबर से जुड़ी जानकारी अंकित नहीं की गई है।

वर्तमान में ऐसे आयुर्वेदिक उप्तादों की जांच की जिम्मेदारी आईएसएम विभाग के पास है। इस संदर्भ में पूछे जाने पर विभाग के एडीएमओ विक्रम सिंह ने बताया कि यह मामला पहली बार संज्ञान में आया है। इसकी जांच की जाएगी और कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
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