मश्कोह घाटी में 15 हजार फुट की ऊंचाई वाली पोजीशन पर बैठा दुश्मन लगातार मोर्टार दाग रहा था। दुर्गम और सामरिक दृष्टि से सुरक्षित पोजीशन से दागे जा रहे मोर्टार भारतीय सेना के लिए चुनौती बने हुए थे।
इस पोजीशन तक पहुंचने और कब्जाने के लिए दो नागा के सिपाही इम्लियाकुम ने असंभव को संभव कर दिखाया। वह बेखटके मोर्टार पोजीशन तक पहुंचकर दुश्मन पर टूट पड़े। फायरिंग के बजाय हैंड टू हैंड फाइट हुई, जिसमें सिपाही इम्लियाकुम की फुर्ती ने दुश्मन के होश उड़ा दिए।
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इम्लियाकुम ने मोर्टार दाग रहे दोनों दुश्मनों को वहीं ढेर कर भारी असलहे पर कब्जा कर लिया। उन्होंने 120 एमएम के तीन और 81 एमएम के दो मोर्टार के अलावा भारी मात्रा में दुश्मन का गोला-बारूद हथिया लिया।
इम्लियाकुम की इस अभूतपूर्व सफलता ने दुश्मन की बेहद सुरक्षित मोर्टार पोजीशन पर भारतीय सेना को कब्जा दिला दिया। सिपाही इम्लियाकुम की बहादुरी, दृढ़ता और आत्मविश्वास के लिए उन्हें भारतीय सेना के दूसरे सर्वोच्च सम्मान महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।