जम्मू। जल शक्ति विभाग शहर की करीब सात लाख आबादी की सेहत से खिलवाड़ कर रहा है। नॉर्थ और साउथ जोन में जिस मुख्य स्टोरेज टैंक से पानी की सप्लाई की जा रही है उसकी 12 वर्षों से सफाई ही नहीं की गई है। लंबे समय से सफाई न होने के कारण तल में कीचड़ और हानिकारक बैक्टीरिया पनप चुके हैं। पांच साल पहले मेडिकल कॉलेज से सैंपल फेल हो चुका है। इसके बावजूद साल में कम से कम छह महीने में सफाई के प्रति विभाग संजीदा नहीं हुआ। हालात इस कदर खराब है कि दीवार पर अंतिम बार कब सफाई (क्लीनिंग) हुई, इसका जिक्र तक नहीं है।
विभागीय गाइडलाइन के अनुसा किसी भी बड़े पेयजल टैंक की सफाई वर्ष में कम से कम दो बार (हर छह महीने में) कराना जरूरी है। टैंक को पूरी तरह खाली कर ब्लीचिंग पाउडर और आधुनिक मशीनों से दीवारों और तल को साफ किया जाना चाहिए। जम्मू के मुख्य टैंक की दीवारों पर काई की मोटी परतें गवाही दे रही हैं कि यहां सालों से सफाई नहीं हुई है। आखिरी बार टैंक को साल 2014 में साफ किया गया था जिसके बाद से अधिकारी सिर्फ फाइलों में ही ऑल इज वेल दिखाते आ रहे हैं।
बंद कमरे में डीसी ने अधिकारियों से की चर्चा
अमर उजाला में दूषित पानी को लेकर प्रकाशित हो रहीं लगातार खबरों के बाद डीसी राकेश मिन्हास ने वीरवार दोपहर तीन बजे जल शक्ति और बिजली विभाग के अधिकारियों संग बैठक की। जल शक्ति विभाग के अधिकारियों ने ढांचा पुराने होने का दुखड़ा सुनाया। बिजली विभाग के अधिकारियों ने अपना अलग ही राग अलापा। अंत में डीसी ने जल शक्ति और बिजली विभाग के अधिकारियों को तालमेल से स्वच्छ पानी की सप्लाई करने को कहा।
2014 में जलशक्ति मंत्री था, उस समय 600 करोड़ के बजट में छह प्रतिशत राशि से टैंकों की सफाई कराई थी। इसके बाद शायद ही किसी अधिकारी ने इस पर ध्यान दिया हो।
- शाम लाल शर्मा, विधायक जम्मू नॉर्थ।