एनआईए की छापेमारी के बाद कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी देखने को मिली। सुरक्षाबलों का मानना है कि पिछले कई महीनों के मुकाबले पत्थरबाजी की घटना में कमी दर्ज हुई है। उनके अनुसार घाटी में एनआईए की छापेमारी के बाद से टेरर फंडिंग पर प्रभाव पड़ा है, जिसके चलते इन घटनाओं में भी कमी दर्ज हुई है। वहीं सेना और सीआरपीएफ को भविष्य में और सुधार आने की उम्मीद है।
सीआरपीएफ के आईजी रविदीप सिंह साही का कहना है कि एनआईए की रेड्स के बाद से इन घटनाओं में काफी कमी देखी गई है। सबसे ज्यादा पत्थरबाजी की घटनाएं अप्रैल में देखने को मिली थीं, लेकिन अब मई, जून, जुलाई और अगस्त में इनमें कमी दर्ज हुई है। साही के अनुसार कुछ लोग पैसा देकर यह पत्थरबाजी करवाते थे।
घाटी में एनआईए की जो रेड हुईँ हैं, उसका सीधा प्रभाव टेरर फंडिंग पर पड़ा है। इसका असर जमीनी स्तर पर अब देखने को मिला है। वहीं सेना की विक्टर फोर्स के जीओसी मेजर जनरल बीएस राजू हालात में और सुधार की उम्मीद जताई है।गृह मंत्रालय का भी यह मानना है कि घाटी में एनआईए की छापेमारी के बाद से टेरर फंडिंग पर शिकंजा कसने के बाद से पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी देखने को मिली है।