अलगाववादी संग्ठन दुखतरन-ए-मिल्लत ने लोगों को फरमान देते हुए उन्हें नए साल की सेलिब्रेशनसे दूर रहने को बोला है। संगठन ने कहा है कि ये आरएसएस का षडयंत्र है घाटी में इस भददे संस्कृति को लाने का।
देर रात तक के कुछ कार्यक्रम गुलमर्ग में कुछ अज्ञात समूह द्वारा आयोजित किए जा रहे हैं। ये पूरी तरह से संस्कृति पर हमला है।
ऐसे कार्यक्रमों को कराने के पीछे आरएसएस की साजिश है। जो शर्मिंदगी से भरा और भददी संस्कृति है भारत की। ये कहना है दुखतरन-ए-मिल्लत की चीफ आसिया अंद्राबी का।
अंद्राबी ने कहा कि ऐसे कुछ शर्मिदंगी से भरे कार्यक्रमों को कुछ उर्दू और अंग्रेजी के अखबार, चैनल आर्ट, म्यूजिक और कॉमेडी के नाम पर स्पांसर कर रहे हैं।
जिसमें बेशर्म बॉलीवुड कलाकारों को इसके लिए न्यौता भेजा गया है। ये पूरी तरह से कश्मीरियों की इस्लामिक विचारधारा का हनन है।
उन्होंने लोगों से कहा है कि वो इस तरह के कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखें। अंद्राबी ने कहा कि कश्मीरियों का असल संस्कृति इस्लाम से जुड़ी है, जिसमें ऐसे न्यूईयर को सेलिब्रेट करना हराम है।
ऐसे कार्यक्रम ब्राहमण संस्कृति से जुड़े हैं इस्लाम से इनका कोई ताल्लुक नहीं है। ऐसे कार्यक्रम कश्मीर की परवाज नहीं है। लेकिन ऐसा परवाज का गिदद किस्मत को गंदगी की ओर ले जाता है।