रियासत में आई बाढ़ से लोगों और कारोबारियों को हुए नुकसान पर चिंता जाहिर करते हुए वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथर ने आश्वासन दिया कि राहत व पुनर्वास पैकेज के लिए केंद्र सरकार को मेमोरंडम सौंपने से पहले तमाम लोगों हितधारकों को शामिल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार व्यापार जगत को हुए नुकसान को कम से कम समय में दूर करने का प्रयास करेगी, लेकिन प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए हर वर्ग को सामूहिक जिम्मेदारी के साथ आगे आना होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि इससे पहले देश में आई प्राकृतिक आपदाओं के राहत और पुनर्वास माडल की सरकार समीक्षा कर रही है, ताकि उत्तराखंड पुनर्वास माडल से बेहतर पैकेज रियासत के लोगों को मुहैया करवाया जा सके।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय से संपर्क किया है और उन्हें एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी), वर्ल्ड बैंक और ग्लोबल फैसिलिटी फार डिजास्टर रिडक्शन एंड रिकवरी (जीएफडीआरआर) जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों को जम्मू-कश्मीर लाने का प्रयास किया जाए।
ताकि वे क्षतिग्रस्त ढांचे और रियासत की आर्थिक सहायता में योगदान कर सकें। उन्होंने कहा कि मिशन जल्द ही रियासत के दौरे पर पहुंचेगा। स्टेट इकनॉमिक रिकंस्ट्रक्शन फोरम के प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राथर ने कहा कि बाढ़ से प्रभावित होने वाली आधारभूत संरचना के पुनर्निर्माण में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए लचीली राहत व पुनर्वास योजना बनाने को कहा।
बैठक में सरकार के वित्तीय सलाहकार जेए खान, प्रिंसिपल सेक्रेटरी बीबी व्यास, कामर्शियल टैक्सेज के कमिश्नर किफायत हुसैन रिजवी, एक्साइज कमिश्नर जफर अहमद, डायरेक्टर फाइनेंस शौकत एजाज, डायरेक्टर कोड्स रफी अंद्राबी, चीफ कोआर्डिनेटर (फाइनेंस डिपार्टमेंट) रिशम कश्यप और जेएंडके बैंक के प्रेसीडेंट मोहम्मद अमीन व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।