संवाद न्यूज एजेंसी
आरएस पुरा। प्रशासन की ओर से सरकार के निर्देश पर सरकारी भूमि खाली कराए जाने पर लोगों ने चिंता जताते हुए इसको लेकर स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर किसान तहरीक के राज्य प्रधान किशोर कुमार ने कहा कि कई स्थानीय लोग राज्य के कई वर्षों से स्थायी नागरिक होने पर उनकी भूमि को भी सरकारी भूमि बताया जा रहा है। दूसरी ओर रोशनी एक्ट के अंतर्गत राशि जमा कराने पर मालिकाना हक मिला, अब इसे सरकारी भूमि बताया जा रहा है।
किसान नेता चौ. मोहन सिंह का कहना है कि सरकारी जमीनों पर लोगों का हक छीनने के फरमान पर कई परिवारों की रोजी- रोटी इसी पर निर्भर है। अब इस भूमि को अवैध कह कर कब्जा मुक्त कराना तानाशाही कदम है। हजारों एकड़ जमीन पर छोटे किसानों और खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब लोगों के जीवन पर सीधा असर पड़ेगा।
राज्य सरकार इस जनविरोधी आदेश को वापस ले लेना चाहिए या लोगो को बताया जाए कि आखिर सरकार इस भूमि का क्या करेगी।
किसान नेता सुभाष दषगोत्रा का कहना है कि जम्मू-कश्मीर सरकार लगभग हर महीने ऐसे आदेश जारी कर रही है, जिसका सीधा असर आम आदमी के जीवन पर पड़ रहा है। सरकार को गरीब आदमी और छोटे किसान के जीवन और हितों की रक्षा के लिए आदेश जारी करने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को बड़े भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाना चाहिए, ताकि छोटे किसानों को हो रही परेशानी से राहत मिल सके।
आरएस पुरा तहसीलदार शुव अहमद शाद का कहना है कि 254 सी, 578 सी, लोकल अलाटियों को घबराने की जरूरत नहीं है। रोशनी एक्ट व घास चराई भूमि के बारे में उन्होंने कहा कि वह सरकारी जमीन होने पर कार्रवाई की जा रही है। जिन लोगों ने रहने के लिए मकान बना रखे हैं, उन पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। अगर कोई व्यवसायिक कार्य के लिए स्टेट लैंड पर कब्जा कर रखा है, उसपर कार्रवाई की जाएगी। अभी तक आरएस पुरा तहसील में 364 कनाल सरकारी भूमि पर राजस्व विभाग की ओर से कार्रवाई की गई है।