जम्मू-कश्मीर में पहाड़ी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) ने पहाड़ी समुदाय को अपनी सूची में शामिल कर लिया है। गृह मंत्रालय इस बाबत कैबिनेट की मंजूरी और अधिसूचना जारी करने की अंतिम तैयारी में है। इस प्रक्रिया के बाद संबंधित बिल को संसद से पास कराना होगा। उम्मीद है कि शीतकालीन सत्र में यह बिल संसद में पास कराया जा सकता है। आयोग की सूची में शामिल किए जाने से पहाड़ी समुदाय में खुशी का माहौल है।
अब तक जम्मू-कश्मीर में 12 समुदायों को एसटी की श्रेणी में शामिल किया जा चुका है। पहली बार प्रदेश में अनुसूचित जनजाति के लिए राजोरी, पुंछ, बारामुला, कुपवाड़ा व अनंतनाग में नौ सीटें आरक्षित की गई हैं। केंद्र सरकार के इस फैसले से इन पांच जिलों के 10 लाख से अधिक लोगों को लाभ पहुंचेगा। राजनीतिक रूप से सशक्त होने के साथ ही उन्हें अनुसूचित जनजाति की हर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। नौकरी से लेकर शिक्षा तक में आरक्षण मिलेगा।
अनुसूचित जनजाति के दर्जे के लिए पहाड़ी समुदाय पिछले तीन दशक से आंदोलनरत है। गृह मंत्री अमित शाह ने 4 अक्तूबर को राजोरी की रैली में कहा था कि केंद्र जस्टिस जीडी शर्मा आयोग की रिपोर्ट लागू करने की दिशा में काम कर रहा है। इस एलान के बाद अनुसूचित जनजाति राष्ट्रीय आयोग (एनसीएसटी) ने पहाड़ी समुदाय को अपनी सूची में शामिल करने की हरी झंडी दे दी है। डीओपीटी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने वीरवार को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी और गृहमंत्री अमित शाह व पीएम नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया।
पद्दारी, कोली और गद्दा ब्राह्मण की भी सिफारिश
रिटायर जज जस्टिस जीडी शर्मा की अध्यक्षता वाले आयोग ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के सामाजिक और शैक्षणिक तौर पर पिछड़े समुदायों को एसटी सूची में शामिल करने की सिफारिश की है। आयोग ने जम्मू-कश्मीर के पद्दारी, कोली और गद्दा ब्राह्मण समुदायों को भी सूची में शामिल करने की अनुशंसा की है। इन्हें रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया ने भी हरी झंडी दे दी है।
गुज्जर-बक्करवाल नाखुश
एसटी श्रेणी में शामिल गुज्जर और बक्करवाल पहाड़ी समुदाय को यह दर्जा दिए जाने से नाखुश हैं। हालांकि केंद्र ने उन्हें आश्वस्त किया है कि पहाड़ी समुदाय को एसटी के दर्जे से उनके अधिकार का किसी भी तरह से हनन नहीं होगा। अमित शाह ने रैली में कहा था कि पहाड़ी समुदाय को हक तो मिलेगा लेकिन इससे गुज्जर-बक्करवाल भाइयों का हक नहीं छिनेगा। किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।