अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। हर नीति और सुधार कार्य में छात्रों को केंद्र में रखें क्योंकि शिक्षा प्रणाली के वही असली हितधारक हैं।
छात्रों को कई चुनौतियों का सामना प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी और समन्वय में कमी के कारण करना पड़ता है। यह बातें शिक्षा, सामाजिक कल्याण, स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू नेे मंगलवार को कहीं।
उन्होंने कहा कि कश्मीर विश्वविद्यालय (केयू) प्रशासन एक छात्र-मैत्रीपूर्ण मॉडल अपनाए जो शैक्षणिक और प्रशासनिक सेवाओं के सुचारु कामकाज को सुनिश्चित करे। हमारे सभी शैक्षणिक संस्थानों की पहली प्राथमिकता छात्र होने चाहिए। उन्हें यह महसूस होना चाहिए कि उनकी समस्याएं सुनी जाती हैं और उसका समाधान तत्काल होेता है। मंत्री इत्तू मंगलवार को सिविल सचिवालय में कश्मीर यूनिवर्सिटी (केयू) के शैक्षणिक और प्रशासनिक कामकाज की समीक्षा कर रही थीं।
मंत्री ने विश्वविद्यालय नेतृत्व से परीक्षा, प्रवेश, वित्तीय प्रबंधन और अनुसंधान कार्यक्रमों के लिए पारदर्शी प्रणाली स्थापित करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि निर्णय लेने में पारदर्शिता और प्रक्रियाओं में स्पष्टता से शिकायतें कम होंगी। छात्रों और समाज की नजर में विश्वविद्यालय की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि कश्मीर विश्वविद्यालय को केवल एक उच्च शिक्षा केंद्र होने से कहीं अधिक बनना चाहिए। यह अवसर, नवाचार और विकास का केंद्र होना चाहिए जहां हर छात्र अपने सपने पूरे करने के लिए सशक्त महसूस करे। मंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन से समयबद्ध तरीके से इन सुधारों को लागू करने के लिए छात्रों और शिक्षकों के साथ मिलकर काम करने को कहा।