- दारुल उलूम कासमिया में कराया निकाह, बताया इबादत का हिस्सा
श्रीनगर। मीरवाइज-ए-कश्मीर डॉ. मौलवी उमर फारूक ने दारुल उलूम कासमिया में निकाह पढ़ाते हुए कहा कि निकाह केवल सामाजिक अनुबंध नहीं, बल्कि एक इबादत है। उन्होंने जोर दिया कि जीवनसाथी का चयन चरित्र और मूल्यों के आधार पर होना चाहिए, न कि धन और रूप-रंग पर।
उन्होंने फिजूलखर्ची वाली शादियों, तलाक की बढ़ती दरों और विवाह से जुड़ी भौतिक अपेक्षाओं पर चिंता जताई और समुदाय से सादगी और ईमानदारी की ओर लौटने का आह्वान किया। ब्यूरो