1,000 रेफर मरीजों में केवल 80 ही भर्ती, स्वास्थ्य मंत्री ने मांगे जिलावार आंकड़े
श्रीनगर। कश्मीर के सबसे बड़े अस्पताल शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (स्किम्स) पर अनावश्यक रेफरल का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि जिलों से आने वाले अधिकतर मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही उपचार मिल सकता है लेकिन उन्हें सीधे स्किम्स भेज दिया जाता है।
स्किम्स के एक डॉक्टर ने बताया कि यहां रेफर किए गए करीब 1,000 मरीजों में से केवल 80 को ही भर्ती किया जाता है जबकि बाकी मरीजों को प्रारंभिक जांच के बाद छुट्टी दे दी जाती है। उन्होंने कहा कि लगभग 20 प्रतिशत मरीजों को ही वास्तव में उन्नत इलाज की जरूरत होती है। बाकी मामलों को जिला या उप-जिला अस्पताल में आसानी से संभाला जा सकता है।
प्रशासन की सख्ती
इस बढ़ती समस्या को देखते हुए सरकार ने कश्मीर घाटी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और जिला अस्पतालों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे मरीजों को अनावश्यक रूप से स्किम्स न भेजें। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस प्रवृत्ति से गंभीर मरीजों को परेशानी होती है और संस्थान पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है।
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिन डॉक्टरों की ओर से बिना ठोस कारण के मरीजों को रेफर किया जाएगा उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इसके लिए प्रत्येक रेफर मरीज और उनके डिस्चार्ज की स्थिति का विवरण मांगा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रेफरल प्रणाली का सख्ती से पालन करने से स्किम्स के डॉक्टर गंभीर मरीजों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाएंगे और संस्थान पर भीड़भाड़ कम होगी।
कोट
सभी जिला और उप-जिला अस्पतालों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे केवल उन्हीं मरीजों को स्किम्स भेजें जिन्हें वास्तव में उन्नत देखभाल की आवश्यकता है। स्किम्स प्रशासन से प्रत्येक जिले से आने वाले रेफरल का विस्तृत डेटा मांगा है। सुविधाएं होने के बावजूद मामूली इलाज के लिए मरीजों को स्किम्स भेजने की प्रथा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- सकीना इत्तू, स्वास्थ्य मंत्री