जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का 35 दिवसीय अनशन 12वें दिन में पहुंचा
लेह। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का 35 दिवसीय आमरण अनशन 12वें दिन में प्रवेश कर गया है। लद्दाख में उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों पर केंद्र की प्रतिक्रिया को लेकर असंतोष पनप रहा है।
लेह अपेक्स बाॅडी (एलएबी) ने गृह मंत्रालय की ओर से लगभग दो सप्ताह बाद छह अक्टूबर को ही वार्ता निर्धारित करने पर गहरी निराशा व्यक्त की है। एलएबी के सह-अध्यक्ष ने कहा कि यह देरी लद्दाख के मुद्दों के प्रति सरकार की गंभीरता की कमी को दर्शाती है।
एलएबी नेता ने खुलासा किया कि आंदोलन को तेज करने के लिए दो बड़े विरोध कार्यक्रमों की योजना बनाई गई थी लेकिन गृह मंत्रालय की ओर से बातचीत का निमंत्रण दिए जाने के बाद उन्हें शुरू में रद्द कर दिया गया था। छह अक्टूबर से पहले लंबे अंतराल को देखते हुए अब ये कार्यक्रम आगे बढ़ेंगे।
एलएबी ने इस बात पर जोर दिया कि लद्दाखी अपनी चिंताओं पर ठोस कार्रवाई के लिए पांच साल से इंतजार कर रहे हैं जिनमें छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा उपायों से लेकर नौकरी की सुरक्षा, भूमि अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और एक समर्पित लोक सेवा आयोग तक शामिल हैं। लेह शीर्ष निकाय ने केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और केंद्र सरकार दोनों से इस प्रक्रिया में तेज़ी लाने का आह्वान किया है।
नेता ने कहा कि अगर केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन इस समस्या का समाधान चाहता है तो उसे तुरंत समाधान निकालना चाहिए। इस बीच सोनम वांगचुक ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखी है जो लद्दाखियों के लिए एक रैली बिंदु बन गया है।