लदाख महोत्सव की शुरुआत
लेह। बहुप्रतीक्षित लद्दाख महोत्सव 2025 की शुरुआत ऐतिहासिक करजू जिंग से हुई, जो लेह के मुख्य बाजार तक निकली भव्य सांस्कृतिक परेड के साथ पूरे शहर को उत्सव की भावना से सराबोर कर गई। चार दिनों तक चलने वाले इस रंगारंग आयोजन में पारंपरिक संगीत, लोक नृत्य और विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
महोत्सव का उद्घाटन केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के पर्यटन सचिव संजीत रोड्रिग्स ने किया। इस अवसर पर एलएएचडीसी लेह के अध्यक्ष ताशी ग्यालसन मुख्य अतिथि और प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता सिद्धांत चतुर्वेदी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जिनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ा दी।
1980 के दशक के उत्तरार्ध में शुरू हुआ यह वार्षिक महोत्सव, लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद और भी भव्य व महत्वपूर्ण बन गया है। इस वर्ष का आयोजन विशेष रूप से सामुदायिक भागीदारी और स्थिरता पर केंद्रित है, जिससे यह लद्दाख के सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल हो गया है। अरुणाचल प्रदेश के तवांग स्थित मोनपा इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से समां बांधा, जबकि लद्दाख के सुदूर गाँवों से आए स्थानीय कलाकारों और प्रतिभाओं ने समारोह को और भी प्रामाणिकता प्रदान की। लोककला, खेल प्रतियोगिताएं और पाक-कला प्रदर्शन आगंतुकों के लिए लद्दाखी संस्कृति की गहरी झलक लेकर आए।
इस बार महोत्सव को और भी विशेष बनाने वाला इसका समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण है। शहर की सड़कों और बाजारों में आयोजित कार्यक्रमों ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों दोनों को सक्रिय रूप से जोड़ा। स्थानीय कारीगरों, रसोइयों और कलाकारों ने परंपरागत शिल्प, व्यंजन और रीति-रिवाजों को प्रस्तुत कर सांस्कृतिक संरक्षण और पुनर्जीवन में योगदान दिया।
हनले मठ के आदरणीय भिक्षुओं द्वारा प्रस्तुत पवित्र मुखौटा नृत्य और उनकी अगुवाई में निकली आध्यात्मिक परेड ने महोत्सव को एक गहन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयाम प्रदान किया।
पर्यटन मंत्रालय के समर्थन से केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का पर्यटन एवं संस्कृति विभाग और लद्दाख पर्यटन एवं संस्कृति समिति द्वारा आयोजित इस उत्सव की एक बड़ी विशेषता इसका शून्य-अपशिष्ट अभियान है। कचरा प्रबंधन से लेकर साहित्य, हस्तशिल्प और कला प्रदर्शनी तक, हर पहलू में पर्यावरणीय जागरूकता झलकती है।
चार दिवसीय लद्दाख महोत्सव 2025 केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि लद्दाख की जीवंत परंपरा, आध्यात्मिकता और एकता का उत्सव है। यह आयोजन पर्यटकों और स्थानीय लोगों दोनों को सांस्कृतिक विविधता, सामुदायिक सहयोग और सतत विकास की अनूठी अनुभूति प्रदान करता है।